करे है तेरे नैना इकरार प्यार का ।
आया है मौसम बसंत बहार का ।।
पेड़ो से झड़ते है पत्ते झर-झर
बागो मे हवा चलती है सर-सर
मन की लताये चड़े प्यार के शिखर
तेरे बिन दिन जाता है अखर
करे है तेरे नैना इकरार प्यार का ।
आया है मौसम बसंत बहार का ।।
पूर्वा पवन लिये सरसो की महक
पेड़ो पर चिड़िया रही है चहक
मिलन की आग सीने मे रही भड़क
जाम प्यार का पीकर रहा मै बहक
करे है तेरे नैना इकरार प्यार का ।
आया है मौसम बसंत बहार का ।।
~• आयुष राज तिवारी •~
Comments