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•~ बसंत (प्यार का ) ~•

करे है तेरे नैना इकरार प्यार का ।
आया है मौसम बसंत बहार का ।।
पेड़ो से झड़ते है पत्ते झर-झर
बागो मे हवा चलती है सर-सर
मन की लताये चड़े प्यार के शिखर
तेरे बिन दिन जाता है अखर
करे है तेरे नैना इकरार प्यार का । 
आया है मौसम बसंत बहार का ।।
पूर्वा पवन लिये सरसो की महक
पेड़ो पर चिड़िया रही है चहक
मिलन की आग सीने मे रही भड़क
जाम प्यार का पीकर रहा मै बहक
करे है तेरे नैना इकरार प्यार का ।
आया है मौसम बसंत बहार का ।।
                             

  ~• आयुष राज तिवारी •~

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बेटियां ....✍️

बेटियों से ही घर ,ये सारा संसार है बेटियों से ही मिलता माँ का प्यार है मत दफ़्न करो इनको यू कोख में क्योकि बेटियां ही इस "सृष्टि" का आधार है।। आयुष राज "विजय"

ज़नाब हम रेलवे कर्मचारी है. ✍️

हमारी रातों से  कुछ यूं   मुलाकात होती है जब हम जगते है ,बाकी सारी दुनिया सोती है ज़नाब हम रेलवे कर्मचारी है  अब रातों को भी ये आंखे कहा सोती है हमारी रातों से  कुछ यूं  मुलाकात होती है जब हम जगते है ,बाकी सारी दुनिया सोती है लोगो के नज़रिये में हमारी जिंदगी औरो से बेहद खास होती है उनका कहना,करना क्या बैठे बैठे हमे तनख्वाह मिलती है उनसे अब कहू भी तो क्या कहू... हमारी राते उनको ही गन्तव्य तक पहुचाने में कुर्बान होती है हमारी रातों से  कुछ यूं  मुलाकात होती है जब हम जगते है ,बाकी सारी दुनिया सोती है यूं तो नौकरियों में हफ्ते की एक छुट्टी जो हर रविवार होती है हफ्ते की छुट्टी तो छोड़ो त्योहारों में भी हमपर ड्यूटी की जिम्मेदारी होती है सारी दुनिया होली,दीपावली मनाये परिवार संग इसके लिए हमारी दीपावली पटाखा सिंग्नल तो हरे-लाल हाथ सिंगनलो के एक्सचेंज संग होली होती है हमारी रातों से  कुछ यूं  मुलाकात होती है जब हम जगते है ,बाकी सारी दुनिया सोती है लोगो की मित्रो,रिश्तेदारो संग बैठक ,मुलाकात होती है हमारी रोज इंजन और सिंगनलो से बात होती है गर्मी,सर्द...

मै प्यार लिखूँगा

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