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Showing posts from 2021

महामारी और भारतीय रेलवे

  विषय :- महामारी और भारतीय रेलवे 16 अप्रैल 1853,बम्बई का बोरी बंदर रेलवे स्टेशन (वर्तमान में छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस) पर हलचल और कौतूहल से भरी अनगिनत आंखे साक्षी बन रही थी ,उस परिदृश्य का जिसने भारत वासियों को रेल पटरियों तथा रेल से परिचित कराया। तब किसने सोचा था कि भारतीय रेलवे हमारी धड़कनो की तरह ,भारत के यातायात व्यवस्था की धड़कन बन जाएगी। सन् 1853 से सफर पर निकली भारतीय रेल हर क्षण अपनी गति के अनुरूप भारत के विकास को गति देती गयी।                    आज इक्कीसवीं सदीं में भारत अपने विकास की रफ्तार को तीव्र गति से आगे बढ़ा रहा है,उस विकास के रीढ़ की हड्डी है भारतीय रेल।भारत के विकास में ही नही बल्कि उसके सुख दुःख ,उत्सव, आनंद में भी भारतीय रेल तथा उसकी पटरियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। महामारी का कठिन दौर और भारतीय रेलवे -                           ...

जब मैं तुम से मिली...

                                                                                  जब मैं तुम से मिली मुझमे  एक एहसास सा जगा कोई खास सा मेहमान दिल के आसपास लगा क्या मालूम ये तुम्हारे प्रति मेरा लगाव या प्यार है जो भी हो पहले शख्स हो तुम जो मुझे अपना सा लगा जब मैं तुम से मिली मुझमे एक एहसास सा जगा अब तो आईने में वो भी खुद को संवारने लगा दिल वो भी मुझसे यूँ लगाने लगा आशिकी के मायने जो अनकहे थे हमारे लिए वो हमें और खुद को समझाने लगा जब मैं तुम से मिली मुझमे  एक एहसास सा जगा जो तन्हा दिल हुआ करता था संग उसके बहलने लगा रात मे आसमां भी चांद तारों संग दुआएं देने लगा देखकर हमारी मोहब्बत के याराने को खुदा भी मुस्कुराकर झूमने लगा जब मैं तुम से मिली मुझमे एक एहसास सा जगा।।                                ...

इश्क़ जताना भी है..✍🏻

इश्क जताना भी है ,तुम्हें मनाना भी है  शिकवे भी,गिले भी,मोहब्बत भी तुमसे  हर लम्हे में तुम्हे सजाना भी है  इश्क जताना भी है ,तुम्हें मनाना भी है ।। इक साथ सफर में चलना भी  है मंजिल पर तुम संग ठहरना भी है हैं ये दिल बस लगाना भी तुमसे खोया तुझमे ही मेरा जमाना भी है  इश्क जताना भी है तुम्हे मनाना भी है ।। खोकर तुझमे खुद को भुलाना भी है  बिन तेरे गुजरे पलों की तनहाइयों को मिटाना भी है  मेरे इजहार का इकरार भी तुमसे हर पल में तुम्हें गुनगुनाना भी है  इश्क जताना भी है तुम्हें मनाना भी है ।। हिस्से के गम ,या हो खुशियों को बांटना भी है  दरम्यान बीते लम्हो को सम्भालना भी है चाहते जो पल रही तुझमे उनको हकीकत से मिलाना भी है इश्क जताना भी है तुम्हें मनाना भी है ।।                                     आयुष राज "विजय"

ज़नाब हम रेलवे कर्मचारी है. ✍️

हमारी रातों से  कुछ यूं   मुलाकात होती है जब हम जगते है ,बाकी सारी दुनिया सोती है ज़नाब हम रेलवे कर्मचारी है  अब रातों को भी ये आंखे कहा सोती है हमारी रातों से  कुछ यूं  मुलाकात होती है जब हम जगते है ,बाकी सारी दुनिया सोती है लोगो के नज़रिये में हमारी जिंदगी औरो से बेहद खास होती है उनका कहना,करना क्या बैठे बैठे हमे तनख्वाह मिलती है उनसे अब कहू भी तो क्या कहू... हमारी राते उनको ही गन्तव्य तक पहुचाने में कुर्बान होती है हमारी रातों से  कुछ यूं  मुलाकात होती है जब हम जगते है ,बाकी सारी दुनिया सोती है यूं तो नौकरियों में हफ्ते की एक छुट्टी जो हर रविवार होती है हफ्ते की छुट्टी तो छोड़ो त्योहारों में भी हमपर ड्यूटी की जिम्मेदारी होती है सारी दुनिया होली,दीपावली मनाये परिवार संग इसके लिए हमारी दीपावली पटाखा सिंग्नल तो हरे-लाल हाथ सिंगनलो के एक्सचेंज संग होली होती है हमारी रातों से  कुछ यूं  मुलाकात होती है जब हम जगते है ,बाकी सारी दुनिया सोती है लोगो की मित्रो,रिश्तेदारो संग बैठक ,मुलाकात होती है हमारी रोज इंजन और सिंगनलो से बात होती है गर्मी,सर्द...

उन्हें मुझपर एतबार न था...

कोशिशें हमने की ,पर उन्हें मुझपर एतबार न था बाते मुलाकाते होती ,पर शायद उन्हें मुझसे प्यार न था उनका दिखावा सही, पर हमने मोहब्बत सच्ची की, करता इंतजार उनका ही शामों-सहर था, कोशिशें हमने की ,पर उन्हें मुझपर एतबार न था बाते मुलाकाते होती ,पर शायद उन्हें मुझसे प्यार न था ।। इक जमाना गुज़ारा उसमे, किया जिसका इजहार था उसने मुझे समझा नही,ना किया इक़रार था, इंतजार में गुजरे घड़िया तन्हा दिन रात की, रिश्ता अब भी बदला नही हमने,क्या करे वो मेरा यार था कोशिशें हमने की ,पर उन्हें मुझपर एतबार न था बाते मुलाकाते होती ,पर शायद उन्हें मुझसे प्यार न था ।। एक - एक पल साल बनकर गुजरा था, हर लम्हा उनके बिना मुझे ना-गवार गुजरा था, रहने को उनमे दिल ने चाहत कुछ यूं की, आईने में खुद के अक्स में करता उनका दीदार था कोशिशें हमने की ,पर उन्हें मुझपर एतबार न था बाते मुलाकाते होती ,पर शायद उन्हें मुझसे प्यार न था ।।                                                       जारी है...✍️ ...

सबक....

हर बात औरों से कहा नही करते जज़्बात अपने यूं ज़ाया नही करते वो दिखावा तो आप मोहब्बत क्यू करें यूं दिलो - जान किसी पर लुटाया नही करते।।                                              आयुष राज "विजय"

फिर आज मुझमे मोहब्बत ज़िंदा हुई.. ✍️

 फिर आज मुझमे मोहब्बत ज़िंदा हुई बिछड़ा जो शक़्स था, उससे आज मुलाक़ात हुई कुछ शिक़वे उसके ,कुछ गिले मेरे बातों ही बातों में, फिर वही बात हुई फिर आज मुझमे मोहब्बत ज़िंदा हुई....।। तनहा गुज़रे दिनों की बात हुई बीते उदास लम्हों की बात हुई कुछ वो तो कुछ मैं कहता इन्ही सब मे हम दोनों की फिर लम्बी बात हुई फिर आज मुझमे मोहब्बत ज़िंदा हुई....।। गुजरा दिन न जाने कब रात हुई वो पहली साथ की चाँदनी रात हुई चांद की रोशनी के सफेद चादर ओढ़े दोनो की आंखे फिर चार हुई फिर आज मुझमे मोहब्बत ज़िंदा हुई....।। कुछ पल के अकेलेपन में खुद से ये बात हुई जो अपना है उसी से ही तो प्यार फिर तक़रार हुई आज वक़्त ने कुछ यूं करवट ली की जुदा हुई मोहब्बत ,फिर सफर में मेरे साथ हुई फिर आज मुझमे मोहब्बत ज़िंदा हुई....।।                                   आयुष राज "विजय"