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Showing posts from 2020

हमने भी कलम थामी है .....

हमने भी कलम थामी है, हर बात लिखे जाऊंगा अपने जज़्बात लिखे जाऊंगा ख़यालात लिखे जाँऊगा जो तुझसे ना मिला प्यार उसका इज़हार लिखे जाऊंगा हमने भी कलम थामी है, हर बात लिखे जाऊंगा।। बीते अपने मुलाकात लिखे जाऊंगा प्यार भरी हर बात लिखे जाऊंगा तेरे ना होने से हुए अपने हालात लिखे जाऊंगा हमने भी कलम थामी है, हर बात लिखे जाऊंगा।। तू साथ नही तनहाई के ,लम्हात लिखे जाऊंगा वो ख़्वाब ,वो चांदनी रात लिखे जाऊंगा अपने रिश्ते के दिन थोड़े ही सही उसपर इक किताब लिखे जाऊंगा हमने भी कलम थामी है, हर बात लिखे जाऊंगा।।                                                  आयुष राज "विजय "  

कुछ ख़्वाब अधूरे होते है...✍🏻

कुछ ख़्वाब अधूरे होते है जीवन के कुछ पन्ने कोरे होते है खुशियों की चाहत हम हर पल करते है पर कुछ पल उनमे धोखे होते है कुछ ख़्वाब अधूरे होते है जीवन के कुछ पन्ने कोरे होते है।। मैंने साथ तुम्हारा मांगा था कुछ पल प्यार तुम्हारा मांगा था खोकर रातों की नीदें ,चाँद निहारा करता था अब तो दिन भी रूखे रूखे होते है कुछ ख़्वाब अधूरे होते है जीवन के कुछ पन्ने कोरे होते है।। दिल की तन्हाई को साथ तुम्हारा मिलना था प्यार भरी राहों पर संग संग दोनों को चलना था अब भी वे राहें राह हमारी तकती होगीं ढूढ़ती होगीं उन कदमों को जो साथ हरकदम होते हैं कुछ ख़्वाब अधूरे होते है जीवन के कुछ पन्ने कोरे होते है।। इजहार-ए-मोहब्बत हमने किया,एतबार तुम्हे तो करना था चाहा था प्यार तुम्हारा हमने,इकरार तुम्हें तो करना था तेरी हर ख्वाहिश पर सौ बार निछावर हो जाता  तेरी इक हां पर मै क्या न कर जाता पर हर किस्से कहा पूरे होते है कुछ ख़्वाब अधूरे होते है जीवन के कुछ पन्ने कोरे होते है।।                                         आयुष राज...

दीदार..✍🏻

मुस्कुराहटें लब पे आये तो आये कैसे निग़ाहें इक झलक दीदार को तरसी है तुझको पाने की तिश्नगी में ये आंखे न जाने कितनी बार बन के घटाए बरसीं है मुस्कुराहटें लब पे आये तो आये कैसे निग़ाहें इक झलक दीदार को तरसी है।। बेताब निगाहें ढूंढती हैं तेरे लबों की हंसी लम्हा बगैर तेरे बिताना अब मुश्किल सा है  यादें भी तेरी कुछ इस कदर काबिज है मुझ पर खुद को खुद मे ढूढना अब मुश्किल सा है बैचैन है धड़कने बिन तेरे शामें भी गुमनाम सी है मुस्कुराहटें लब पे आये तो आये कैसे निग़ाहें इक झलक दीदार को तरसी है।। मुहब्बत को जताने की कोशिशें हमने लाख की है जरूरी नहीं कि जुबां से हर बात की जाये कुछ तो ख्याल करो अनकही खामोशियों का चले भी आओ कि अब दिन का पता नहीं  रातें भी तन्हा ,उदास सी है मुस्कुराहटें लब पे आये तो आये कैसे निग़ाहें इक झलक दीदार को तरसी है।।।                                          आयुष राज "विजय"

इक नयी दुनिया बनाते है..✍🏻

कुछ नया सोचते है, इक नयी दुनिया बनाते है जहाँ रिश्तो के अपनेपन का वजूद हो कुछ प्यार के पल अनमोल हो बातों का हमारे अपनो में कुछ मोल हो चर्चे हो सबकी तरक़्क़ी के,ऐसा जहां बनाते है कुछ नया सोचते है, इक नयी दुनिया बनाते है।। जहाँ किसी से ना कोई शिकवा ना गिला हो जो आये कुछ अच्छा हिस्से में अपने,वो सबको मिला हो एक दूसरे का हम सहारा बने न कोई पराया हो, ऐसा जहां बनाते है कुछ नया सोचते है, इक नयी दुनिया बनाते है।। हर किसी के हर पल का हम हिस्सा हो खुशियों के दरिया का हम किनारा हो उन्नति का विकास का नज़ारा हो चलो इस सफ़र के रास्ते को हम मिल कर सजाते है कुछ नया सोचते है, इक नयी दुनिया बनाते है।।                                          आयुष राज"विजय"

एक रात रोया हूं मैं भी...

एक रात रोया हूं मैं भी साथ उसके.... पलकें भीगी आवाज कुछ भारी हुई उसने कहा क्या तुम रो रहे हो मेरा जवाब था नही तो उसने कहा किससे झूठ बोलते हो डांटकर उसने बोला अब चुप हो जाओ फिर बातें सारी रात हुई साथ उसके एक रात रोया हूं मैं भी साथ उसके.... बातें सुबह शाम होती,थोड़ी नोकझोंक तो थोड़ा प्यार होता उसका रूठना मेरा मनाना हर बार होता हम करीब तो थे पर,विश्वास की थोड़ी कमी सी हो गयी इसलिए दूरियां बढ़ती गयी साथ उसके एक रात रोया हूं मैं भी साथ उसके.... न जाने क्या अनबन हुई या उसका मन भर आया मैं जान ना सका वो मुझसे नाराज थी या परेशान मैंने मनाने की हर कसर पूरी की पर उसपर उसका कोई जवाब नही आज वक़्त कुछ यूं हम नही है साथ उसके एक रात रोया हूं मैं भी साथ उसके....✍🏻✍🏻😢😢                                       आयुष राज "विजय"

हौसला..

हौसला कभी नही हमने छोड़ा हवाओं के रुखों को हमने हर बार मोड़ा परिस्थितियां भले विपरीत रही हो हमारे  पर मंजिल का रास्ता हमने कभी नही छोड़ा।।                                   आयुष राज "विजय"

मुझे अच्छा नही लगता..✍️

न जाने क्यूं तेरा औरों के संग मुस्कुराना मुझे अच्छा नही लगता फिर वो पल,वो दिन,  मुझे अच्छा नही लगता मैं इस कदर पागल हूं तुझमे रहने को कि कोई लम्हा अब तेरे बिन अच्छा नही लगता न जाने क्यूं तेरा औरों के संग मुस्कुराना मुझे अच्छा नही लगता।। तेरे कुछ दायरे होंगे माना मैंने पर औरों से फ़ासले होना भी जरूरी है दोस्ती यारी तुम्हारी भी है माना मैंने पर तेरा ये रिश्ता  मुझे अच्छा नही लगता न जाने क्यूं तेरा औरों के संग मुस्कुराना मुझे अच्छा नही लगता।। फिर भी हमारे दरम्यां कुछ बिगड़ा नही है रिश्ते हमारे भी हम तुम निभा रहे कुछ मुस्कुराहटें हमारे लिए भी बचा के रखो क्योकि महफ़िल में तेरे हम हो ये औरों को अच्छा नही लगता न जाने क्यूं तेरा औरों के संग मुस्कुराना मुझे अच्छा नही लगता।।                                                         आयुष राज "विजय"

हम तो तनहा थे ,तनहा ही रह गए....✍️

ख़्वाहिशें दिल मे दफन, जमाने गुजर गए हम तो तनहा थे ,तनहा ही रह गए.... चाहत के कुछ खास पलो को बड़ी आस में जिया हमने तुझको चाहा पल पल तेरा इंतजार किया हमने पर अरमान मेरे पूरे ना हुए, अधूरे रह गए.. ख़्वाहिशें दिल मे दफन, जमाने गुजर गए हम तो तनहा थे ,तनहा ही रह गए....।। तुमने पलट कर ना देखा, हम बुलाते रह गए तेरी बज़्म में हम फरियाद लगाते रह गए क़ाश कभी मेरी मुहब्बत को ,तुमने समझा होता तुम भूले, हम भुलाने से रह गए।। ख़्वाहिशें दिल मे दफन, जमाने गुजर गए हम तो तनहा थे ,तनहा ही रह गए.... तेरी आवाज की वो खनक हम सुनने से रह गए गुलशन में खिलने को थे फूल, खिलने से रह गए उम्मीद ना छोड़ेंगे ,इक दिन  आना है  तुम्हे ... बस इसी इंतजार में "आयुष",तुम्हे लिखते रह गए... ख़्वाहिशें दिल मे दफन, जमाने गुजर गए हम तो तनहा थे ,तनहा ही रह गए....✍️✍️                                           आयुष राज "विजय"

• गलतफ़हमियां •

गलतफ़हमियां कुछ हमने तो,कुछ तुमने भी पाली, दरम्यां मुहब्बत के हमने ,शक की दीवार ढाली, मुक़ददर के तवारीख में, जो होगा मिलेगा हर हाल में वो या फिर चोट हो,तड़प हो या बिन हमसफ़र मकां खाली। गलतफ़हमियां कुछ हमने तो,कुछ तुमने भी पाली।।.. कोशिशें कुछ हमने तो,कुछ तुमने कर डाली, पर न जाने क्यों हर बार ,अपने हाथ रह गए खाली, यूं सब कुछ उस खुदा पर छोड़ना,या हो कोसना अच्छा तो नही चलो इक बार फिर करे खुद से मुहब्बत, शायद छटे ये घटा काली गलतफ़हमियां कुछ हमने तो,कुछ तुमने भी पाली, दरम्यां मुहब्बत के हमने ,शक की दीवार ढाली ।। गलतफहमियां कुछ हमने तो ,कुछ तुमने भी.........                                                                          आयुष राज "विजय"

~ क़िस्मत ~

क़िस्मत पे यक़ीन इतना... रखना, असफ़लताओ में भी हौसला रखना, मेहनत से बंद रस्ते भी खुल जाते है चंद ठोकरों से जिंदगी नही रुकती ये ख्याल रखना।।                                                           आयुष राज "विजय"

~• दोस्त•~

ठोकरें खाकर मेरे कदम जब डगमगाते है ये फ़रिश्ता मुझे हर बार थाम लेता है हाँ ये वही दोस्त है, जो मेरे हिस्से के भी दुःख उठा लेता है, खुशी के अपने पलो को,मेरे हिस्से में लाता है अच्छा दोस्त ही हमारे भटकते कदमो को सच्चे राह पर लाता है।। ये फ़रिश्ता मुझे हर बार थाम लेता है। आयुष राज "विजय"