इश्क जताना भी है ,तुम्हें मनाना भी है शिकवे भी,गिले भी,मोहब्बत भी तुमसे हर लम्हे में तुम्हे सजाना भी है इश्क जताना भी है ,तुम्हें मनाना भी है ।। इक साथ सफर में चलना भी है मंजिल पर तुम संग ठहरना भी है हैं ये दिल बस लगाना भी तुमसे खोया तुझमे ही मेरा जमाना भी है इश्क जताना भी है तुम्हे मनाना भी है ।। खोकर तुझमे खुद को भुलाना भी है बिन तेरे गुजरे पलों की तनहाइयों को मिटाना भी है मेरे इजहार का इकरार भी तुमसे हर पल में तुम्हें गुनगुनाना भी है इश्क जताना भी है तुम्हें मनाना भी है ।। हिस्से के गम ,या हो खुशियों को बांटना भी है दरम्यान बीते लम्हो को सम्भालना भी है चाहते जो पल रही तुझमे उनको हकीकत से मिलाना भी है इश्क जताना भी है तुम्हें मनाना भी है ।। आयुष राज "विजय"
" हक में हमारे, अपने पल कर दो - तुम संग ही बीते,ऐसे सारे कल कर दो ....✍🏻आयुष राज "विजय" (मुहब्बत का कवि हूँ, समाज को आइना भी दिखाता हूँ )