वो रूठना तेरा ,मेरा मनाना याद आता है, मेरी बहकी बातों पे तेरा मुस्कुराना याद आता है।। मुलाकातों के सिलसिले,प्यार की वो बातें, तेरा दबे पांव दिल मे उतरना याद आता है, वो रूठना तेरा,मेरा मनाना याद आता है। मेरी बहकी बातों पे तेरा मुस्कुराना याद आता है।। जुबां की खामोशी , निगाहों का अंदाज-ए-बयां इजहार याद आता है, तेरी झुकी नजरो से अनकहा वो इकरार याद आता है। चाहत की जमी पर फैला आसमां प्यार का, रंगे गुलशन साथ यार का, तेरी हर शरारत पर मेरा खुद को मनाना याद आता है। वो रूठना तेरा ,मेरा मनाना याद आता है, मेरी बहकी बातों पे तेरा मुस्कुराना याद आता है।। जुनून-ए-इश्क़ का वो गुजरा जमाना याद आता है। तेरी हर ख्वाहिश पर हँसकर खुद को लुटाना याद आता है। मेरे प्यार की कोई इंतेहा न थी तेरी खातिर, तड़प उठता है दिल ,जब-जब वो फ़साना याद आता है वो रूठना तेरा ,मेरा मनाना याद आता है। मेरी बहकी बातों पे तेरा मुस्कुराना याद आता है। आयुष राज 'विजय'
" हक में हमारे, अपने पल कर दो - तुम संग ही बीते,ऐसे सारे कल कर दो ....✍🏻आयुष राज "विजय" (मुहब्बत का कवि हूँ, समाज को आइना भी दिखाता हूँ )