अंगारे पर राख जमी हो तो क्या, उसकी धधक नही होती कम , भारत मां को आँख उठा कर देखे जो, उसका सीना छलनी कर देते हम ।। आयुष राज "विजय"
" हक में हमारे, अपने पल कर दो - तुम संग ही बीते,ऐसे सारे कल कर दो ....✍🏻आयुष राज "विजय" (मुहब्बत का कवि हूँ, समाज को आइना भी दिखाता हूँ )