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मेरे बारे में...✍

      

प्रिय पाठको ,                                A r tiwari
आप सभी को नमस्कार,         
आप सभी का मेरे ब्लॉग पर

स्वागत है,उम्मीद करते है कि 
हमसे और हमारी कविताओं से 
जुड़ने के बाद हमारा आपका रिश्ता
लम्बे समय तक कायम रहे।मैं प्रेम का कवि हूँ मोहब्बत को तरजीह देता हूँ किन्तु इसका ये मतलब नहीं है कि मैं अन्य मुद्दों पर कविता नही करता, आवश्यक होने पर मैं अन्य मुद्दों पर कविता के माध्यम से अपनी बात जरूर रखता हूँ।
मैंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया है,वर्तमान समय मे स्नातक की पढ़ाई कर रहा हूँ एवं भारतीय रेलवे में अपनी सेवाये दे रहा हूँ,जो निरन्तर जारी है। साथ ही साथ कविता लेखन का क्रम भी जारी है

  प्रारम्भ में मेरी लिखी दो पंक्तियां -
                      मुद्दतें गुजर गई उनका दीदार हुए
                       अभी महीनों नही हुए प्यार हुए  ।।

आप सभी मेरी कविताओं को पढ़े और मेरे ब्लॉग को सब्सक्राइब जरूर करे।जिससे मेरे नई कविताओं की जानकारी आपको मिलती रहे,और हमारा आपका जुड़ाव निरन्तर बना रहे।

                                                               धन्यवाद-
                                                      आयुष राज "विजय
                                                         भारतीय रेलवे                                        
                        

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बेटियां ....✍️

बेटियों से ही घर ,ये सारा संसार है बेटियों से ही मिलता माँ का प्यार है मत दफ़्न करो इनको यू कोख में क्योकि बेटियां ही इस "सृष्टि" का आधार है।। आयुष राज "विजय"

ज़नाब हम रेलवे कर्मचारी है. ✍️

हमारी रातों से  कुछ यूं   मुलाकात होती है जब हम जगते है ,बाकी सारी दुनिया सोती है ज़नाब हम रेलवे कर्मचारी है  अब रातों को भी ये आंखे कहा सोती है हमारी रातों से  कुछ यूं  मुलाकात होती है जब हम जगते है ,बाकी सारी दुनिया सोती है लोगो के नज़रिये में हमारी जिंदगी औरो से बेहद खास होती है उनका कहना,करना क्या बैठे बैठे हमे तनख्वाह मिलती है उनसे अब कहू भी तो क्या कहू... हमारी राते उनको ही गन्तव्य तक पहुचाने में कुर्बान होती है हमारी रातों से  कुछ यूं  मुलाकात होती है जब हम जगते है ,बाकी सारी दुनिया सोती है यूं तो नौकरियों में हफ्ते की एक छुट्टी जो हर रविवार होती है हफ्ते की छुट्टी तो छोड़ो त्योहारों में भी हमपर ड्यूटी की जिम्मेदारी होती है सारी दुनिया होली,दीपावली मनाये परिवार संग इसके लिए हमारी दीपावली पटाखा सिंग्नल तो हरे-लाल हाथ सिंगनलो के एक्सचेंज संग होली होती है हमारी रातों से  कुछ यूं  मुलाकात होती है जब हम जगते है ,बाकी सारी दुनिया सोती है लोगो की मित्रो,रिश्तेदारो संग बैठक ,मुलाकात होती है हमारी रोज इंजन और सिंगनलो से बात होती है गर्मी,सर्द...

मै प्यार लिखूँगा

मैं प्यार लिखूंगा इजहार लिखूंगा..  वो पहली मुलाकात मेरे यार लिखूंगा ....  होठों पे तेरे तैरती मुस्कान लिखूंगा... 2 गालों का तेरे रंग सुर्ख लाल लिखूंगा...  मैं प्यार लिखूंगा इजहार लिखूंगा वो पहली कयामत मेरे यार लिखूंगा. तेरी कटीली आँखे तलवार लिखूँगा.. 2 इस दिल पे हुए सारे मै वार लिखूँगा....  मैं प्यार लिखूंगा इजहार लिखूंगा..  वो पहली खामोशी मेरे यार लिखूंगा ....  तेरे मेरे नैना चार लिखूँगा... 2 आँखों आँखों हुई सारी बात लिखूँगा....  मैं प्यार लिखूंगा इजहार लिखूंगा..  वो पहली कहानी मेरे यार लिखूंगा .... इक रात लिखूंगा तुम्हें मैं ख्वाब लिखूंगा.. 2 वो पूर्णिमा की चांदनी रात लिखूँगा...  मैं प्यार लिखूंगा इजहार लिखूंगा वो पहली बहार मेरे यार लिखूंगा....  महके बसंत वाली बयार लिखूँगा.. 2 सावन की पहली रिमझिम फुहार लिखूँगा...  मैं प्यार लिखूंगा इजहार लिखूंगा..  वो पहली मुलाकात मेरे यार लिखूंगा .... 2                                         ...