15 अगस्त 1947 को हमारे देश के आधुनिक भारत के नौ जीवन का आगाज हुआ।समूचा भारत हर्षोल्लास से ओत-प्रोत था।एक द्वि:स्वप्न पीछे छूट चुका था, और एक आज़ादी का प्रकाश पुंज बाहें फैला कर हमारा स्वागत कर रहा था।सभी भारतवासी के मन मे राम राज्य की कल्पना थी,और वह कह रहा था -
"अब न कभी डर होगा,न अँधेरा होगा,
उल्लवल होगा वर्तमान, और एक नया सवेरा होगा"
दोस्तो आज आज़ादी के सातवें दशक में हम प्रवेश कर चुके है,भारत वही है,भारतीयता वही है,किन्तु आज का भारतवासी कह रहा है कि -
"हे जन गण मन के गान तुम्हारा क्या होगा
मेरे देश महान तुम्हारा क्या होगा
हे पुरखों के सम्मान तुम्हारा क्या होगा
प्यारा हिंदुस्तान तुम्हारा क्या होगा "
आज देश की दशा और दिशा दोनो बदल चुके है,हमारा समाज आज कई वर्गों में बटा पड़ा है,हम चाहे जितने नारे लगा ले लेकिन सच्चाई यही है कि -
"आज नारे लगाए नही जाते,बल्कि लगवाये जाते है "
आज समाज के मायने बदल चुके हैं, हालात इस कदर बद्दतर हो गए हैं कि एकता का दिखावा भी हम ढंग से नही कर पा रहे और -
"ऐसा एक बार नही,सौ बार हुआ है
बैठक सभा जुलूस,सब बेकार हुआ है
हमदम शिकार हो रहा है बन्दर बांट का
अपना समाज घर का रहा न घाट का "
धर्म ,मजहब, जाति के नाम पर हम एक दूसरे के खून के प्यासे हो गए हैं,"वसुधैव कुटुम्बकम"की भावना रखने वाला देश आज अपने ही घर मे बटा पड़ा है ।अनेकता में एकता भारत की विशेषता रही हैं, किन्तु धर्म के ठेकेदारों ने अखंडता को खण्ड खण्ड कर दिया है, हमे धर्म के ठेकेदारों से दूर रहना होगा -
दोस्तो ...
"मन्दिर मस्जिद के लिए मत लड़ो
हर हिंदू बुरा है न मुसलमान बुरा है
अगर इंसानियत नही है तो
वो इंसान बुरा है "
आज हमे देश की पुरातन संस्कृति को उसके पुराने गौरव में वापस लाना होगा।देश के बाहर और भीतर दोनो मोर्चो पर हमें सफल होना होगा।देश के दुश्मन जो आतंक की शय लेकर हमे चोट पहुंचाने की नापाक कोशिश करते है,और हर बार मुँह की खाते है।फिर भी हमे कमजोर समझने की भूल करते है तो उन्हें बता दू -
सब्र का बांध टूटेगा तो,फ़ना करके रख दूँगा
दुश्मन से जरा कह दो कि अभी गरजा नही हू मैं।।
दोस्तो इन दशकों में हम कुछ मोर्चो पर असफल हुए है तो कुछ मोर्चो पर सफल भी हुए है।भ्र्ष्टाचार,सम्प्रदायिकता हमारे दामन के दाग है तो,मंगलयान, अग्नि और पृथ्वी हमारी शान है।किंतु लड़ाई अभी खत्म नही हुई है,इसी लिए दोस्तो अंत मे यही कहना चाहूंगा -
"तास के पत्तो से ताजमहल नही बनता
नदी को रोकने से वो समंदर नही बनता
लड़ते रहो जिंदगी से हर पल
क्योकि एक जीत से कोई सिकन्दर नही बनता"
जय हिंद जय भारत जय हिंदुस्तान।।
आयुष राज "विजय"

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