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Showing posts from August, 2016

•~ वजूद ~•

पनपते रहे वो ख्वाब , जिनका वजूद न  था  मेरे कोई नही इतना , जितना तू करीब था पनपते रहे वो ख्वाब , जिनका वजूद न  था  प्यार का हमारे असास , इतना नाजुक न था  बस अपने कौल से मुकर तू गया  इश्क मे मिलते है जरर भी, इसका एहसास न था पनपते रहे वो ख्वाब , जिनका वजूद न  था  मेरे कोई नही इतना , जितना तू करीब था अपनी फितरत मे , फरेब न था   समां पे जलने को , परवाना हो गया मै इतना भी तो बेगाना न था  मेरे कोई नही इतना , जितना तू करीब था पनपते रहे वो ख्वाब , जिनका वजूद न  था  मेरे कोई नही इतना , जितना तू करीब था                                                            - आयुष राज ''विजय''

•~ सावन ~•

प्यार के सावन की इक, फुहार चाहता हूं जो मेरे मन को भिगो दे, ऐसी बरसात चाहता हूं    तबस्सुम के दीदार के खातिर ता उम्र मै तेरा साथ चाहता हूं  प्यार के सावन की इक, फुहार चाहता हूं           जो मेरे मन को भिगो दे, ऐसी बरसात चाहता हूं                                               मेरा दिल आवारा, इक आशियाना चाहता हूं प्यार के इज्हार की , इजाजत चाहता हूं जो मेरे मन को भिगो दे, ऐसी बरसात चाहता हूं प्यार के सावन की इक, फुहार चाहता हूं अपने प्यार पे तेरा एतबार चाहता हूं जो कभी खत्म ना हो, ऐसा प्यार चाहता हूं प्यार के सावन की इक, फुहार चाहता हूं जो मेरे मन को भिगो दे, ऐसी बरसात चाहता हूं                                                    - आयुष राज '' विजय ''