फिर आज मुझमे मोहब्बत ज़िंदा हुई बिछड़ा जो शक़्स था, उससे आज मुलाक़ात हुई कुछ शिक़वे उसके ,कुछ गिले मेरे बातों ही बातों में, फिर वही बात हुई फिर आज मुझमे मोहब्बत ज़िंदा हुई....।। तनहा गुज़रे दिनों की बात हुई बीते उदास लम्हों की बात हुई कुछ वो तो कुछ मैं कहता इन्ही सब मे हम दोनों की फिर लम्बी बात हुई फिर आज मुझमे मोहब्बत ज़िंदा हुई....।। गुजरा दिन न जाने कब रात हुई वो पहली साथ की चाँदनी रात हुई चांद की रोशनी के सफेद चादर ओढ़े दोनो की आंखे फिर चार हुई फिर आज मुझमे मोहब्बत ज़िंदा हुई....।। कुछ पल के अकेलेपन में खुद से ये बात हुई जो अपना है उसी से ही तो प्यार फिर तक़रार हुई आज वक़्त ने कुछ यूं करवट ली की जुदा हुई मोहब्बत ,फिर सफर में मेरे साथ हुई फिर आज मुझमे मोहब्बत ज़िंदा हुई....।। आयुष राज "विजय"