विषय :- महामारी और भारतीय रेलवे 16 अप्रैल 1853,बम्बई का बोरी बंदर रेलवे स्टेशन (वर्तमान में छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस) पर हलचल और कौतूहल से भरी अनगिनत आंखे साक्षी बन रही थी ,उस परिदृश्य का जिसने भारत वासियों को रेल पटरियों तथा रेल से परिचित कराया। तब किसने सोचा था कि भारतीय रेलवे हमारी धड़कनो की तरह ,भारत के यातायात व्यवस्था की धड़कन बन जाएगी। सन् 1853 से सफर पर निकली भारतीय रेल हर क्षण अपनी गति के अनुरूप भारत के विकास को गति देती गयी। आज इक्कीसवीं सदीं में भारत अपने विकास की रफ्तार को तीव्र गति से आगे बढ़ा रहा है,उस विकास के रीढ़ की हड्डी है भारतीय रेल।भारत के विकास में ही नही बल्कि उसके सुख दुःख ,उत्सव, आनंद में भी भारतीय रेल तथा उसकी पटरियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। महामारी का कठिन दौर और भारतीय रेलवे - ...
" हक में हमारे, अपने पल कर दो - तुम संग ही बीते,ऐसे सारे कल कर दो ....✍🏻आयुष राज "विजय" (मुहब्बत का कवि हूँ, समाज को आइना भी दिखाता हूँ )