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Showing posts from February, 2016

~• आशिकी ( एक चाहत ) भाग -8

जिन्दगी को तुझपे एतबार है , तुम बिना दिल बेकरार है । जिस दिन से दिल तुम्हारा हुआ, जिन्दगी का हर पल तुम्हारा हुआ , तिन्श्रगी हमारी बेशुमार है तुम बिना दिल बेकरार है, जिन्दगी को तुझपे एतबार है , तुम बिना दिल बेकरार है । हाल-ए-दिल हमारा ऐसा हुआ, तड़पती प्यासी धरती जैसा हुआ, तुम्हारे आने का इन्तजार है, तुम बिना दिल बेकरार है, जिन्दगी को तुझपे एतबार है , तुम बिना दिल बेकरार है । ~ आयुष राज तिवारी ~

शायरी -7

उन्हे दिल की तड़प कैसे बताये , जो हमारा एतबार नही करते है , एहसास उन्हे इस तड़प का तब होगा , जब उनका एतबार टूटेगा ।। ~ आयुष राज तिवारी ~

शायरी -6

वर्षो गुजर गये उनका दीदार हुये , अभी महीनो नही बीते उनसे प्यार हुये , रातो को आते है वो ख्वाब बनकर , फिर भी अकेला हू उनका साथ होते हुये ।। # आयुष 

~• आशिकी ( एक चाहत ) •~ भाग -7

आशिकी मे तुम पर जां हम लुटाते रहे । और तुम तो हमे आजमाते रहे ।।  -2 ता उम्र हम तुम्हे चाहते रहे , आशिकी मे तुम पर जां हम लुटाते रहे । तुम को चाहा है,हमने सब भूल कर, तेरे यादो की रंगी चुनर ओढ़ कर, उसपे सपने नये हम सजाते रहे। और तुम तो हमे आजमाते रहे ।। आशिकी मे तुम पर जां हम लुटाते रहे । और तुम तो हमे आजमाते रहे ।। -2 हमको मिले जमाने के कितने गम, पर अपने आँसू को पलको मे छुपाये रहे, और तुम्हे खुशियां बांटते हम रहे, और तुम तो हमे आजमाते रहे । आशिकी मे तुम पर जां हम लुटाते रहे । और तुम तो हमे आजमाते रहे ।।  -2 ~ आयुष राज तिवारी ~

शायरी-5

अपना हर पल मै बिताता हूँ , तेरी यादो की फिजाओं मे । ये काश तू मुझको मिल जाये ,  यू अ़ाते जाते राहो मे ।।

शायरी -4

कभी नजरो से तुम मिली ,    कभी तुमसे नजर मिली ,  गुलशन मे है बहार ,            है कलिया खिली खिली ।।

~शायरी~ 3

आज रात चाँदनी सवेरा देखा , लेकिन खुद को मैने अकेला देखा , फिर देखने को कुछ और न था , पर मैने आशिक को अ़जाब मे देखा ।। ~आयुष राज तिवारी ~

आशिकी ( एक चाहत ) भाग -6

प्यार मे हमने तुमको ये दिल दे दिया , पर हमे क्या पता तुमने सौदा किया ।। ख्वाहिश हमारी थी बस यही ऐ सनम , इक फसाना बनायेगे साथ हम , पर ख्वाबो को मेरे तुमने अब्तर किया , मुझ पर अब्र दुखो का ढहा है दिया ।  प्यार मे हमने तुमको ये दिल दे दिया , पर हमे क्या पता तुमने सौदा किया । तुम न आये तुम्हे हम बुलाते रहे , तेरे जज्ब् हमे तड़पाते रहे , खत मे चेहरा तुम्हारा हम बनाते रहे , ऐसे-ऐसे ही दिन हम बिताते रहे ।। प्यार मे हमने तुमको ये दिल दे दिया , पर हमे क्या पता तुमने सौदा किया । ~आयुष राज तिवारी~

शायरी-२

इश्क की आरजू मे जिन्दगी को उनपे लुटाये बैठे , और वो बेवफा किसी गैर की बाहो मे समाये बैठे , सोचा एक दिन बतायेंगी खता किसकी थी , इस आस मे उनका रस्ता सजाये बैठे ।। ~आयुष राज तिवारी ~

~• मेरी खता •~

अपने प्यार को अंजाम दे न सका , उनके कांधे पर सिर रख कर सो न सका , उसकी खता भी क्या कहूं , मै खुद इश्क का पैगाम दे  न सका ।। तमन्ना थी उन्हे आग़ोश मे लेने की , पर ख्वाहिश अधूरी रह गयी , मै उस फिदाई की फितरत क्या कहूं , मै फसाने का इल्म करा न सका ।।

~• मेरा बचपन •~

बचपन का हर पल याद आता है, सोचकर मां- बाप के संघर्षो को अपना दिल भर जाता है " कदम पहला चला था पिता की अंगुली पकड़ कर, कभी खुद चलता और गिरता अगर , मां मेरी दौड़ कर आती उधर , और कहती मुझसे मेरे लाल तुम जा रहे थे किधर," बचपन का हर पल याद आता है, सोचकर मां- बाप के संघर्षो को अपना दिल भर जाता है इसके आगे मै लिख नही पाया और मेरी कलम रुक गयी, शायद इसके आगे लिख पाऊ ? # आयुष राज तिवारी #

~ स्वार्थ ~

" आज खोया हुआ समाज मे सत्य है , पर लोगो को खूब भा रहा असत्य है , अरे हम तो गाँधीवाद के पुजारी है , लेकिन आज कर रहे कितने कु-कृत्य है ।। जिस गाँधी ने हमे सिखाया अहिंसा , सब पाठ भूल कर कर रहे हम हिंसा , आज हम कितने ना समझ हो गये कि अपनी इस भूल की खुद कर रहे प्रशंसा ।। ~ आयुष राज तिवारी ~

~ श्रध्दांजलि ~

शियाचीन की घटना पर  " जिसने देखा निज- स्वार्थ कभी ना , बधा कभी ना मोह बन्धन मे , करता नमन मै उन शहीदो को , लगा दिया जिसने निज जीवन भारत मां के रक्षण मे ।। # आयुष राज तिवारी #

~• वो तुम हो •~

जिन्दगी को है एतबार जिसपर, वो तुम हो करते है हम जिससे प्यार , वो तुम हो जिस्म मे दिल तो है पर जान, वो तुम हो मेरे दिल के जज्बात  जो  वो तुम हो जिसको पाने के लिए करता रब से फरियाद, वो तुम हो रातो को जो मेरे सपने सजाता , वो तुम हो मेरे आज और कल मे , मेरे जिन्दगी के हर पल पल मे,  वो तुम हो जिन्दगी मे जिसे पाने की ख्वाहिश की, वो तुम हो बस तुम हो ।।

~• डगर •~

मै एेसी डगर चला ऐ ज़हीरो , जिसपर कोई अ़स्फाक ना मिला , मगर मिले बहुत अग्यार, अालिम , पर कोई निगार ना मिला ।   मै ऐसी डगर चला ऐ जहीरो , जिसपर कोई अ़स्फाक ना मिला ।। मेरा उफ्ताद तो देखो ऐ हबीबो , कि मेरे जमीर को जदा तो मिली, पर कोई गमगुस्सार ना मिला ।     मै ऐसी डगर चला ऐ जहीरो , जिसपर कोई अ़स्फाक ना मिला ।। मेरा कोई नालिश नही जमाने से, मुझे अब्तर मेरे अपनो ने किया, क्या पता इसका अस्बाब क्या था, पर मुझे बहुत अहजान मिला ।    मै ऐसी डगर चला ऐ जहीरो , जिसपर कोई अ़स्फाक ना मिला ।। ~• आयुष राज " विजय  "~

~ बेवफाई ~

" आज मुलाकात के चन्द लम्हात् याद आये , तुम्हारी यादो के कुछ खयालात् याद आये , पर अपने पास तुम्हे न पाकर , तुम्हारी बेवफाइ के कुछ सवालात् याद आये ।।  ~• आयुष राज तिवारी •~

~ शायरी ~

तू घटा वो है जो बरसती नही है , तू लहर ओ है जिसमे हलचल नही है , आयुष है प्यासा बहुत मगर क्या करे , तू अपने होठो का जाम पिलाती नही है ।                                                                              ~• आयुष राज तिवारी •~

~• वफा-ए-यार •~

वफा की राह पर चलकर हमने देखा है , टूटे दिल के हर जख्म को हमने देखा है , उस बेवफा को क्या पता, वफा क्या होती है , आज भी उसको ही दिल मे बसाये हमने रखा है।।  ~• आयुष राज तिवारी •~

~ दिल की जुबां ~

मोहब्बत करने वाले , बदनाम हुआ करते है , पर आशिक इन सब से , अनजान हुआ करते है  लुत्फ तो इक बार आशिकी का उठाओ यारो क्योकी आशिकी मे गुलशन , गुलजार हुआ करते है ।।                  ~• आयुष राज तिवारी •~      

•~ बसंत (प्यार का ) ~•

करे है तेरे नैना इकरार प्यार का । आया है मौसम बसंत बहार का ।। पेड़ो से झड़ते है पत्ते झर-झर बागो मे हवा चलती है सर-सर मन की लताये चड़े प्यार के शिखर तेरे बिन दिन जाता है अखर करे है तेरे नैना इकरार प्यार का ।  आया है मौसम बसंत बहार का ।। पूर्वा पवन लिये सरसो की महक पेड़ो पर चिड़िया रही है चहक मिलन की आग सीने मे रही भड़क जाम प्यार का पीकर रहा मै बहक करे है तेरे नैना इकरार प्यार का । आया है मौसम बसंत बहार का ।।                                 ~• आयुष राज तिवारी •~

•~ आशिकी (एक चाहत) ~• भाग -5

"तुम सुबह मेरी हो , तुम ही तुम शाम हो, तुम ही रातो के ख्वाबो , का अरमान हो, जिन्दगी के सभी रास्ते तुम से है, तुम ही मेरे सावन , की बरसात हो। तुम सुबह मेरी हो तुम ही तुम शाम हो, तुम ही रातो के, ख्वाबो का अरमान हो।। तसस्बुर मे तुम हो, तुम ही नजरो मे हो, तुम हो नदिया की कल-कल, झरनो मे तुम हो, प्राण से प्यारा तुमको, माना किये, तुम ही मेरे जीवन का , आधार हो, तुम सुबह मेरी हो ,तुम ही तुम शाम हो, तुम ही रातो के, ख्वाबो का अरमान हो ।।                                            ~•आयुष राज तिवारी •~

•~ आशिकी (एक चाहत) ~• भाग -4

मै प्यार बहुत तुम से करता हूं , पर कहने से डरता हूं , दुनिया की कोई परवाह नहीं , तेरे इनकार से डरता हूं । मै प्यार बहुत तुम से करता हूं , पर कहने से डरता हूं ।। ख्वाबो मे तुम रोज आते हो , नीदें तुम ही तो चुराते हो , मै खयाल तुम्हारा करता हूं , पर तुम्हे खोने से डरता हूं । मै प्यार बहुत तुम से करता हूं , पर कहने से डरता हूं ।। # Aayush raj tiwari #

•~ आशिकी ( एक चाहत ) ~• भाग -3

तेरे प्यार का जुनून , मेरे हर पल मे है , तेरे आने की खबर , हर घर मे है , माना होगे तेरे आशिक हजारो , पर वो मुझसे , कम...कम...है ।। तेरे प्यार का जुनून , मेरे हर पल मे है , तेरे आने की खबर , हर घर मे है । तेरा साथ पाकर , बड़े मगरूर हम है , सागर के पा नदी का , जैसे गुरूर हम दम है , दुनिया की मत कर  परवाह कोई , साथ जो तेरे , हम...हम...है , तेरे प्यार का जुनून , मेरे हर पल मे है , तेरे आने की खबर , हर घर मे है ।।                                                    ~• आयुष राज तिवारी •~

•~आशिकी ( एक चाहत )~• भाग-2

आशिकी का मजा ,मुझे आता रहा , पर मै प्यार अपना , तुझसे छुपाता रहा , खत्म ना हो मेरी आशिकी का जुनून , इस लिए मै तुझे , गुनगुनाता रहा , आशिकी का मजा ,मुझे आता रहा , पर मै प्यार अपना , तुझसे छुपाता रहा ।। रातो को आसमां के , तारे गिनता रहा , बागों  से कलिया प्यार , की चुनता रहा , मै तुम्हारे मे था इतना खोया हुआ , तेरी यादो मे मै , मुस्कुराता रहा , आशिकी का मजा ,मुझे आता रहा , पर मै प्यार अपना , तुझसे छुपाता रहा ,                                                                                        ~• आयुष राज तिवारी •~

~• आशिकी •~(एक चाहत ) भाग -1

बहुत चाहते है तुम्हे,  दिलो जां से हम । बता ना सके हम , कि बेबश है हम ।। -2 कि तुम्हारी ये अदायें, सितम ढ़ा रही है , फिर भी तुम्हारे लिए हम, जिये जा रहे है, बहुत चाहते है तुम्हे,  दिलो जां से हम । बता ना सके हम , कि बेबश है हम ।। हाल-ए-दिल अपना तुम्हे, कैसे बताये,  कि तुम्हारे बिना क्या से, क्या हो गये हम,  बहुत चाहते है तुम्हे,  दिलो जां से हम । बता ना सके हम , कि बेबश है हम ।। सोचा किये थे हम , की तुम साथ होगे, पर कोई गम नही कि, न तुम साथ हो, बहुत चाहते है तुम्हे,  दिलो जां से हम । बता ना सके हम , कि बेबश है हम ।। ~• Aayush Raj Tiwari •~

~• इजहार •~

नन्ही सी इक जान , जिसे मै प्यार करता हूँ । इश्क का इजहार यारो, खुलेआम करता हूँ ।। क्या पता मुझे वो , मिले या ना मिले । पर मै " आयुष " उसके इरादो को सलाम करता हूँ ।।                                                                                           ~आयुष राज तिवारी~