"तुम सुबह मेरी हो , तुम ही तुम शाम हो,
तुम ही रातो के ख्वाबो , का अरमान हो,
जिन्दगी के सभी रास्ते तुम से है,
तुम ही मेरे सावन , की बरसात हो।
तुम सुबह मेरी हो तुम ही तुम शाम हो,
तुम ही रातो के, ख्वाबो का अरमान हो।।
तसस्बुर मे तुम हो, तुम ही नजरो मे हो,
तुम हो नदिया की कल-कल, झरनो मे तुम हो,
प्राण से प्यारा तुमको, माना किये,
तुम ही मेरे जीवन का , आधार हो,
तुम सुबह मेरी हो ,तुम ही तुम शाम हो,
तुम ही रातो के, ख्वाबो का अरमान हो ।।
~•आयुष राज तिवारी •~
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