अभी मासूम हूं जिंदगी जी नही,जीने की तमन्ना है कल का भरोसा क्या,यहाँ हर लम्हा बदलता है हमारी जिंदगी से यू खिलवाड़ अच्छा नही यू किसी और की लापरवाहियों की भेंट चढ़ी जिंदगी है किसी की बहन तो किसी की माँ से बेटी के रिश्तों की डोर टूटी है अरे पिता के कलेजे के टुकड़े के सांसो की डोर टूटी है यहा तो सरकार की गलतियों की बलि चढ़ी जिंदगी आज दुनिया से हमारे हर सम्बन्धो की डोर टूटी है मानवीकृत दुखद घटना 24/5/2019 सूरत,गुजरात आयुष राज "विजय"
" हक में हमारे, अपने पल कर दो - तुम संग ही बीते,ऐसे सारे कल कर दो ....✍🏻आयुष राज "विजय" (मुहब्बत का कवि हूँ, समाज को आइना भी दिखाता हूँ )