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Showing posts from January, 2019

ख़्वाब- एक अक्स ....✍️

ख़्वाब तेरे मेरी आँखों मे  हर रात नज़र आते है आईनें के मेरे तस्वीर में तेरे अक्स नज़र आते है मासूमियत तेरी,तेरी आँखों मे  डूबे सादगी के हर लब्ज़ नजर आते है ख़्वाब तेरे मेरी आँखों मे  हर रात नज़र आते है अल्फ़ाज को अब ज़बाँ की ज़रूरत नही अब तो निग़ाहों से ही इज़हार-ए-प्यार नज़र आते है मदहोश हैं किस कदर  मेरे दिल के हालात नजर आते है ख़्वाब तेरे मेरी आँखों मे  हर रात नज़र आते है कुछ दूरियां है दरम्यां  पर वो दिल के कितने पास नज़र आते है छोड़ चुका अब दिल सब्र का दामन उनको पाने को "आयुष" कितने  बेकरार नजर आते है ख़्वाब तेरे मेरी आँखों मे  हर रात नज़र आते है।।                                                                                               आयुष राज "विजय"

बेटियां ....✍️

बेटियों से ही घर ,ये सारा संसार है बेटियों से ही मिलता माँ का प्यार है मत दफ़्न करो इनको यू कोख में क्योकि बेटियां ही इस "सृष्टि" का आधार है।। आयुष राज "विजय"