ऐ हवा ऐ हवा गुनगुना तू जरा ऐ हवा ऐ हवा गुनगुना तू जरा।। रातो की नीदें मेरी यू ना चुरा, ऐ हवा ऐ हवा गुनगुना तू जरा........... मेरे ख्वाबो को मुझसे तू मिला, ऐ हवा ऐ हवा गुनगुना तू जरा........... वक्त ठहरा पल है ठहरा, ठहरा जमीं आंसमा.. ऐ हवा ऐ हवा गुनगुना तू जरा........... मैंने खुद को खुद में ढूढा, पर न जाने गुम हूं कहां.. ऐ हवा ऐ हवा गुनगुना तू जरा........... वो मिले दिल मिले, इश्क का मुकम्मल हो जहां.. ऐ हवा ऐ हवा गुनगुना तू जरा........... जिन्दगी यू चल पड़े,चल पड़े ये समां, ऐ हवा ऐ हवा गुनगुना तू जरा। ऐ हवा ऐ हवा गुनगुना तू जरा।। Aayush "vijay"
" हक में हमारे, अपने पल कर दो - तुम संग ही बीते,ऐसे सारे कल कर दो ....✍🏻आयुष राज "विजय" (मुहब्बत का कवि हूँ, समाज को आइना भी दिखाता हूँ )