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नारी : तुम भाग्य विधाता हो

             हे शक्तिमयी तुम जननी तुम ही भाग्य विधाता हो हे नारी आधार प्रेम का स्नेह का निर्झर सावन हो क्षमा-दान ,बलिदान ,त्याग का सन्तोष का अपरिमित सागर हो तुम ढाल हो अपनो का तुम्ही तो जीवन दाता हो हे नारी तुम ही आदि अंत  तुम ही त्रिभुवन की धारा हो जननी तुम ही भाग्य विधाता हो... 🙏🏻                                               आयुष राज "विजय"