जब मैं तुम से मिली मुझमे एक एहसास सा जगा कोई खास सा मेहमान दिल के आसपास लगा क्या मालूम ये तुम्हारे प्रति मेरा लगाव या प्यार है जो भी हो पहले शख्स हो तुम जो मुझे अपना सा लगा जब मैं तुम से मिली मुझमे एक एहसास सा जगा अब तो आईने में वो भी खुद को संवारने लगा दिल वो भी मुझसे यूँ लगाने लगा आशिकी के मायने जो अनकहे थे हमारे लिए वो हमें और खुद को समझाने लगा जब मैं तुम से मिली मुझमे एक एहसास सा जगा जो तन्हा दिल हुआ करता था संग उसके बहलने लगा रात मे आसमां भी चांद तारों संग दुआएं देने लगा देखकर हमारी मोहब्बत के याराने को खुदा भी मुस्कुराकर झूमने लगा जब मैं तुम से मिली मुझमे एक एहसास सा जगा।। ...
" हक में हमारे, अपने पल कर दो - तुम संग ही बीते,ऐसे सारे कल कर दो ....✍🏻आयुष राज "विजय" (मुहब्बत का कवि हूँ, समाज को आइना भी दिखाता हूँ )