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Showing posts from November, 2020

दीदार..✍🏻

मुस्कुराहटें लब पे आये तो आये कैसे निग़ाहें इक झलक दीदार को तरसी है तुझको पाने की तिश्नगी में ये आंखे न जाने कितनी बार बन के घटाए बरसीं है मुस्कुराहटें लब पे आये तो आये कैसे निग़ाहें इक झलक दीदार को तरसी है।। बेताब निगाहें ढूंढती हैं तेरे लबों की हंसी लम्हा बगैर तेरे बिताना अब मुश्किल सा है  यादें भी तेरी कुछ इस कदर काबिज है मुझ पर खुद को खुद मे ढूढना अब मुश्किल सा है बैचैन है धड़कने बिन तेरे शामें भी गुमनाम सी है मुस्कुराहटें लब पे आये तो आये कैसे निग़ाहें इक झलक दीदार को तरसी है।। मुहब्बत को जताने की कोशिशें हमने लाख की है जरूरी नहीं कि जुबां से हर बात की जाये कुछ तो ख्याल करो अनकही खामोशियों का चले भी आओ कि अब दिन का पता नहीं  रातें भी तन्हा ,उदास सी है मुस्कुराहटें लब पे आये तो आये कैसे निग़ाहें इक झलक दीदार को तरसी है।।।                                          आयुष राज "विजय"

इक नयी दुनिया बनाते है..✍🏻

कुछ नया सोचते है, इक नयी दुनिया बनाते है जहाँ रिश्तो के अपनेपन का वजूद हो कुछ प्यार के पल अनमोल हो बातों का हमारे अपनो में कुछ मोल हो चर्चे हो सबकी तरक़्क़ी के,ऐसा जहां बनाते है कुछ नया सोचते है, इक नयी दुनिया बनाते है।। जहाँ किसी से ना कोई शिकवा ना गिला हो जो आये कुछ अच्छा हिस्से में अपने,वो सबको मिला हो एक दूसरे का हम सहारा बने न कोई पराया हो, ऐसा जहां बनाते है कुछ नया सोचते है, इक नयी दुनिया बनाते है।। हर किसी के हर पल का हम हिस्सा हो खुशियों के दरिया का हम किनारा हो उन्नति का विकास का नज़ारा हो चलो इस सफ़र के रास्ते को हम मिल कर सजाते है कुछ नया सोचते है, इक नयी दुनिया बनाते है।।                                          आयुष राज"विजय"

एक रात रोया हूं मैं भी...

एक रात रोया हूं मैं भी साथ उसके.... पलकें भीगी आवाज कुछ भारी हुई उसने कहा क्या तुम रो रहे हो मेरा जवाब था नही तो उसने कहा किससे झूठ बोलते हो डांटकर उसने बोला अब चुप हो जाओ फिर बातें सारी रात हुई साथ उसके एक रात रोया हूं मैं भी साथ उसके.... बातें सुबह शाम होती,थोड़ी नोकझोंक तो थोड़ा प्यार होता उसका रूठना मेरा मनाना हर बार होता हम करीब तो थे पर,विश्वास की थोड़ी कमी सी हो गयी इसलिए दूरियां बढ़ती गयी साथ उसके एक रात रोया हूं मैं भी साथ उसके.... न जाने क्या अनबन हुई या उसका मन भर आया मैं जान ना सका वो मुझसे नाराज थी या परेशान मैंने मनाने की हर कसर पूरी की पर उसपर उसका कोई जवाब नही आज वक़्त कुछ यूं हम नही है साथ उसके एक रात रोया हूं मैं भी साथ उसके....✍🏻✍🏻😢😢                                       आयुष राज "विजय"

हौसला..

हौसला कभी नही हमने छोड़ा हवाओं के रुखों को हमने हर बार मोड़ा परिस्थितियां भले विपरीत रही हो हमारे  पर मंजिल का रास्ता हमने कभी नही छोड़ा।।                                   आयुष राज "विजय"