पलकें भीगी आवाज कुछ भारी हुई
उसने कहा क्या तुम रो रहे हो
मेरा जवाब था नही तो
उसने कहा किससे झूठ बोलते हो
डांटकर उसने बोला अब चुप हो जाओ
फिर बातें सारी रात हुई साथ उसके
एक रात रोया हूं मैं भी साथ उसके....
बातें सुबह शाम होती,थोड़ी नोकझोंक तो थोड़ा प्यार होता
उसका रूठना मेरा मनाना हर बार होता
हम करीब तो थे पर,विश्वास की थोड़ी कमी सी हो गयी
इसलिए दूरियां बढ़ती गयी साथ उसके
एक रात रोया हूं मैं भी साथ उसके....
न जाने क्या अनबन हुई या उसका मन भर आया
मैं जान ना सका वो मुझसे नाराज थी या परेशान
मैंने मनाने की हर कसर पूरी की
पर उसपर उसका कोई जवाब नही
आज वक़्त कुछ यूं हम नही है साथ उसके
एक रात रोया हूं मैं भी साथ उसके....✍🏻✍🏻😢😢
आयुष राज "विजय"

Comments