कुछ नया सोचते है, इक नयी दुनिया बनाते है
जहाँ रिश्तो के अपनेपन का वजूद हो
कुछ प्यार के पल अनमोल हो
बातों का हमारे अपनो में कुछ मोल हो
चर्चे हो सबकी तरक़्क़ी के,ऐसा जहां बनाते है
कुछ नया सोचते है, इक नयी दुनिया बनाते है।।
जहाँ किसी से ना कोई शिकवा ना गिला हो
जो आये कुछ अच्छा हिस्से में अपने,वो सबको मिला हो
एक दूसरे का हम सहारा बने
न कोई पराया हो, ऐसा जहां बनाते है
कुछ नया सोचते है, इक नयी दुनिया बनाते है।।
हर किसी के हर पल का हम हिस्सा हो
खुशियों के दरिया का हम किनारा हो
उन्नति का विकास का नज़ारा हो
चलो इस सफ़र के रास्ते को हम मिल कर सजाते है
कुछ नया सोचते है, इक नयी दुनिया बनाते है।।
आयुष राज"विजय"

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