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Showing posts from April, 2021

ज़नाब हम रेलवे कर्मचारी है. ✍️

हमारी रातों से  कुछ यूं   मुलाकात होती है जब हम जगते है ,बाकी सारी दुनिया सोती है ज़नाब हम रेलवे कर्मचारी है  अब रातों को भी ये आंखे कहा सोती है हमारी रातों से  कुछ यूं  मुलाकात होती है जब हम जगते है ,बाकी सारी दुनिया सोती है लोगो के नज़रिये में हमारी जिंदगी औरो से बेहद खास होती है उनका कहना,करना क्या बैठे बैठे हमे तनख्वाह मिलती है उनसे अब कहू भी तो क्या कहू... हमारी राते उनको ही गन्तव्य तक पहुचाने में कुर्बान होती है हमारी रातों से  कुछ यूं  मुलाकात होती है जब हम जगते है ,बाकी सारी दुनिया सोती है यूं तो नौकरियों में हफ्ते की एक छुट्टी जो हर रविवार होती है हफ्ते की छुट्टी तो छोड़ो त्योहारों में भी हमपर ड्यूटी की जिम्मेदारी होती है सारी दुनिया होली,दीपावली मनाये परिवार संग इसके लिए हमारी दीपावली पटाखा सिंग्नल तो हरे-लाल हाथ सिंगनलो के एक्सचेंज संग होली होती है हमारी रातों से  कुछ यूं  मुलाकात होती है जब हम जगते है ,बाकी सारी दुनिया सोती है लोगो की मित्रो,रिश्तेदारो संग बैठक ,मुलाकात होती है हमारी रोज इंजन और सिंगनलो से बात होती है गर्मी,सर्द...

उन्हें मुझपर एतबार न था...

कोशिशें हमने की ,पर उन्हें मुझपर एतबार न था बाते मुलाकाते होती ,पर शायद उन्हें मुझसे प्यार न था उनका दिखावा सही, पर हमने मोहब्बत सच्ची की, करता इंतजार उनका ही शामों-सहर था, कोशिशें हमने की ,पर उन्हें मुझपर एतबार न था बाते मुलाकाते होती ,पर शायद उन्हें मुझसे प्यार न था ।। इक जमाना गुज़ारा उसमे, किया जिसका इजहार था उसने मुझे समझा नही,ना किया इक़रार था, इंतजार में गुजरे घड़िया तन्हा दिन रात की, रिश्ता अब भी बदला नही हमने,क्या करे वो मेरा यार था कोशिशें हमने की ,पर उन्हें मुझपर एतबार न था बाते मुलाकाते होती ,पर शायद उन्हें मुझसे प्यार न था ।। एक - एक पल साल बनकर गुजरा था, हर लम्हा उनके बिना मुझे ना-गवार गुजरा था, रहने को उनमे दिल ने चाहत कुछ यूं की, आईने में खुद के अक्स में करता उनका दीदार था कोशिशें हमने की ,पर उन्हें मुझपर एतबार न था बाते मुलाकाते होती ,पर शायद उन्हें मुझसे प्यार न था ।।                                                       जारी है...✍️ ...