http://epaper.navbharattimes.com/details/66665-21119-1.html हमारी वो पहली मुलाकात मुझे लौटा दो ना वक़्त का पाबंद था मैं फिर भी वक़्त से पहले तुझसे मिलने आता था.(2) बीते वो लम्हे वो जमाने मुझे लौटा दो ना.. हमारी वो पहली मुलाकात मुझे लौटा दो ना।। आज तन्हाइयां मुझे जीने नही देती यादें तेरी हर पल सताती है (2) दुआ रब से मेरी,मेरा हमसफ़र मुझे लौटा दो ना.. हमारी वो पहली मुलाकात मुझे लौटा दो ना ।। जिंदगी की घड़ियां बे वक़्त हो गयी अब एक पल का बीतना कई साल हो गया (2) मेरे इस अकेलेपन से अच्छा खोया हुआ मेरा वो एहसास मुझे लौटा दो ना.... हमारी वो पहली मुलाकात मुझे लौटा दो ना ।। एक समय था जब न इश्क़ का पता था न रुसवाइयों का न तन्हाईयों का न बिछड़ने का न तड़पने का मुझे मेरे बचपन का वो हँसता हुआ आंगन मुझे लौटा दो ना, मुझे लौटा दो ना।। आयुष राज "विजय"
" हक में हमारे, अपने पल कर दो - तुम संग ही बीते,ऐसे सारे कल कर दो ....✍🏻आयुष राज "विजय" (मुहब्बत का कवि हूँ, समाज को आइना भी दिखाता हूँ )