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Showing posts from 2019

पल वो लौटा दो ना....✍️

http://epaper.navbharattimes.com/details/66665-21119-1.html हमारी वो पहली मुलाकात मुझे लौटा दो ना वक़्त का पाबंद था मैं फिर भी वक़्त से पहले तुझसे मिलने आता था.(2) बीते वो लम्हे वो जमाने मुझे लौटा दो ना.. हमारी वो पहली मुलाकात मुझे लौटा दो ना।। आज तन्हाइयां मुझे जीने नही देती यादें तेरी हर पल सताती है (2) दुआ रब से मेरी,मेरा हमसफ़र मुझे लौटा दो ना.. हमारी वो पहली मुलाकात मुझे लौटा दो ना ।। जिंदगी की घड़ियां बे वक़्त हो गयी अब एक पल का बीतना कई साल हो गया (2) मेरे इस अकेलेपन से अच्छा खोया हुआ मेरा वो एहसास मुझे लौटा दो ना.... हमारी वो पहली मुलाकात मुझे लौटा दो ना ।। एक समय था जब न इश्क़ का पता था न रुसवाइयों का न तन्हाईयों का न बिछड़ने का न तड़पने का मुझे मेरे बचपन का वो हँसता हुआ आंगन मुझे लौटा दो ना, मुझे लौटा दो ना।।                    आयुष राज "विजय"

कीमत मासूम जिंदगी की....

अभी मासूम हूं जिंदगी जी नही,जीने की तमन्ना है कल का भरोसा क्या,यहाँ हर लम्हा बदलता है हमारी जिंदगी से यू खिलवाड़ अच्छा नही यू किसी और की लापरवाहियों की भेंट चढ़ी जिंदगी है किसी की बहन तो किसी की माँ से बेटी के रिश्तों की डोर टूटी है अरे पिता के कलेजे के टुकड़े के सांसो की डोर टूटी है यहा तो सरकार की गलतियों की बलि चढ़ी जिंदगी  आज दुनिया से हमारे हर सम्बन्धो की डोर टूटी है  मानवीकृत दुखद घटना 24/5/2019 सूरत,गुजरात                                     आयुष राज "विजय"

आज फिर तुम...✍️

आज फिर तुम ख़्यालों में आ ही गयी धड़कने दिल की तुम बढ़ा ही गयी अत्फ़ का दीप मन मे जला इस कदर जब अब्र बन प्रेम का तुम बरस ही गयी आज फिर तुम ख़्यालों में आ ही गयी धड़कने दिल की तुम बढ़ा ही गयी

आओ करे मतदान..✍️

आओ करे मतदान ,आओ करे मतदान जन जन का ऐलान ,आओ करे मतदान ये अपना अधिकार है अपनी बात उठाओ सच्चे लोकतंत्र के तुम सच्चे प्रहरी कहलाओ कर अपने मत का प्रयोग इस पर्व का बढ़ाओ मान आओ करे मतदान आओ करे मतदान ।। एक वोट से बदलेगा भारत का आयाम आप बनायेगे अपने सपनो का आसमान आप बुनेंगे इस देश का भविष्य और वर्तमान आओ करे मतदान आओ करे मतदान।।                                 आयुष राज "विजय"

नारी..

उठो हे शक्ति अब व्रत तोड़ो इन दुष्टो का संघार करो तुम्हे किसी की क्या जरूरत तुम खुद ही अपना हथियार बनो इस कलयुग में कोई कृष्ण न आएंगे जो द्रोपदी का फिर चीर बढ़ाएंगे सो अब खुद खड्ग,तीर,तलवार उठाओ कलयुग के दुर्योधन का मान मिटाओ कर अंत दुष्ट का फिर से सृष्टि का सार बनो तुम खुद ही अपना हथियार बनो उठो हे शक्ति अब व्रत तोड़ो इन दुष्टो का संघार करो।।                              आयुष राज "विजय"

अभिनंदन का अभिवंदन...✍️

                      अभिनंदन के अदम्य  शौर्य का अभिवंदन हैं जो  गर्जा ना-पाक पर आकाश से उस अभिनंदन के  वीर पराक्रम  का अभिवंदन हैं अभिनंदन के अदम्य  शौर्य का अभिवंदन हैं काँपा जिससे दुश्मन,हर दांव था जिसका भारी उसका पाकिस्तान बिगाड़े क्या जिसके थे इरादे फ़ौलादी करते हम  अभिनंदन के  उस साहस का अभिवंदन हैं। अभिनंदन के अदम्य  शौर्य का अभिवंदन हैं आयुष राज "विजय"

पराक्रम को सलाम

बहुत हुआ शांति वार्ता समझौता सुलह का ना हो पायेगा कब तक हम धैर्य धरे अब और बर्दाश्त न हो पायेगा बस इसी लिए बातचीत का ये नया दौर अपनाया हैं अब जो भी दुश्मन हरकत में आएगा,मुहतोड़ जवाब वो पायेगा भारत अब गरजा है ज़र्रा ज़र्रा थर्रा जाएगा बन कर शोला बम का गोला दुश्मन पर बरपायेगा सेना ने शौर्य पराक्रम का फिर इतिहास दोहराया है कुछ पल सब्र करो बस अब दुश्मन का नामोनिशान मिटाएगा भारत अब गरजा है ज़र्रा ज़र्रा थर्रा जाएगा...✍️ आयुष राज "विजय"

शहीदों को नमन ( पुलवामा आतंकी हमला)

महोदय शन्ति का रास्ता अब नहीं जंचता मिटा दो मानचित्र से नाम पाकिस्तान अब नही सजता किये बहुत प्रयास हमने,मौके भी कई दिए सेना के धैर्य ,सहन के हमने,प्रमाण कई दिए किन्तु अब ये आभास हुआ..एक सर्जिकल से सुधरेगा ये 'ना-पाक' नही लगता महोदय शन्ति का रास्ता अब नहीं जंचता मिटा दो मानचित्र से नाम पाकिस्तान अब नही सजता                                            अभी जारी है..✍️                                                    आयुष राज "विजय"

ख़्वाब- एक अक्स ....✍️

ख़्वाब तेरे मेरी आँखों मे  हर रात नज़र आते है आईनें के मेरे तस्वीर में तेरे अक्स नज़र आते है मासूमियत तेरी,तेरी आँखों मे  डूबे सादगी के हर लब्ज़ नजर आते है ख़्वाब तेरे मेरी आँखों मे  हर रात नज़र आते है अल्फ़ाज को अब ज़बाँ की ज़रूरत नही अब तो निग़ाहों से ही इज़हार-ए-प्यार नज़र आते है मदहोश हैं किस कदर  मेरे दिल के हालात नजर आते है ख़्वाब तेरे मेरी आँखों मे  हर रात नज़र आते है कुछ दूरियां है दरम्यां  पर वो दिल के कितने पास नज़र आते है छोड़ चुका अब दिल सब्र का दामन उनको पाने को "आयुष" कितने  बेकरार नजर आते है ख़्वाब तेरे मेरी आँखों मे  हर रात नज़र आते है।।                                                                                               आयुष राज "विजय"

बेटियां ....✍️

बेटियों से ही घर ,ये सारा संसार है बेटियों से ही मिलता माँ का प्यार है मत दफ़्न करो इनको यू कोख में क्योकि बेटियां ही इस "सृष्टि" का आधार है।। आयुष राज "विजय"