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पराक्रम को सलाम


बहुत हुआ शांति वार्ता समझौता सुलह का ना हो पायेगा
कब तक हम धैर्य धरे अब और बर्दाश्त न हो पायेगा
बस इसी लिए बातचीत का ये नया दौर अपनाया हैं
अब जो भी दुश्मन हरकत में आएगा,मुहतोड़ जवाब वो पायेगा

भारत अब गरजा है ज़र्रा ज़र्रा थर्रा जाएगा
बन कर शोला बम का गोला दुश्मन पर बरपायेगा
सेना ने शौर्य पराक्रम का फिर इतिहास दोहराया है
कुछ पल सब्र करो बस अब दुश्मन का नामोनिशान मिटाएगा


भारत अब गरजा है ज़र्रा ज़र्रा थर्रा जाएगा...✍️

आयुष राज "विजय"

Comments

Unknown said…
अदभुत प्रशंसनीय।
आपके द्वारा की गई प्रशंसा एवम उत्साहवर्धन के लिए आपका तहे दिल से धन्यवाद।
Gunnu said…
Bahut hi adbhut....��
#Gunnu आप के द्वारा की गई प्रशंसा को मेरा धन्यवाद किंतु प्रश्न चिन्ह क्यो?

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बेटियां ....✍️

बेटियों से ही घर ,ये सारा संसार है बेटियों से ही मिलता माँ का प्यार है मत दफ़्न करो इनको यू कोख में क्योकि बेटियां ही इस "सृष्टि" का आधार है।। आयुष राज "विजय"

ज़नाब हम रेलवे कर्मचारी है. ✍️

हमारी रातों से  कुछ यूं   मुलाकात होती है जब हम जगते है ,बाकी सारी दुनिया सोती है ज़नाब हम रेलवे कर्मचारी है  अब रातों को भी ये आंखे कहा सोती है हमारी रातों से  कुछ यूं  मुलाकात होती है जब हम जगते है ,बाकी सारी दुनिया सोती है लोगो के नज़रिये में हमारी जिंदगी औरो से बेहद खास होती है उनका कहना,करना क्या बैठे बैठे हमे तनख्वाह मिलती है उनसे अब कहू भी तो क्या कहू... हमारी राते उनको ही गन्तव्य तक पहुचाने में कुर्बान होती है हमारी रातों से  कुछ यूं  मुलाकात होती है जब हम जगते है ,बाकी सारी दुनिया सोती है यूं तो नौकरियों में हफ्ते की एक छुट्टी जो हर रविवार होती है हफ्ते की छुट्टी तो छोड़ो त्योहारों में भी हमपर ड्यूटी की जिम्मेदारी होती है सारी दुनिया होली,दीपावली मनाये परिवार संग इसके लिए हमारी दीपावली पटाखा सिंग्नल तो हरे-लाल हाथ सिंगनलो के एक्सचेंज संग होली होती है हमारी रातों से  कुछ यूं  मुलाकात होती है जब हम जगते है ,बाकी सारी दुनिया सोती है लोगो की मित्रो,रिश्तेदारो संग बैठक ,मुलाकात होती है हमारी रोज इंजन और सिंगनलो से बात होती है गर्मी,सर्द...

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