बंदिशे बहुत है ,सामाजिक,रीति-रिवाजों की। कोशिश की इक उड़ान भरो तो, आसमां को इंतजार है, तुम्हारे कदम चूमने की।। आयुष राज "विजय"
" हक में हमारे, अपने पल कर दो - तुम संग ही बीते,ऐसे सारे कल कर दो ....✍🏻आयुष राज "विजय" (मुहब्बत का कवि हूँ, समाज को आइना भी दिखाता हूँ )