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Showing posts from 2017

•~ बे-चैन रात ~•

                                        http://epaper.navbharattimes.com/details/48582-32127-1.html दिन तो बे-करार ही था, अब रातें भी बे-चैन हो रही.. नींद भी पलको पे बैठ, चाँदनी निहारती रही .....2.।। बेशक दिल तो था पास मेरे,    पर ख्यालो में यादें उनकी ही आती रही...। दिन तो बे-करार ही था, अब रातें भी बे-चैन हो रही..।। उनकी  शबनमी  झलक इन निगाहों ने देखा.. नूर-ए-शबनम अभी तक पी है रही , उनकी जुल्फों की घटाए भी.. गरज हम पे बरसती रही...। दिन तो बे-करार ही था, अब रातें भी बे-चैन हो रही...।। नींद भी पलको पे बैठ, चाँदनी निहारती रही...। साजिशें खूब हवाओं ने भी रची.. फिर भी खुशबू उनकी हम तक आती रही..., उनके तबस्सुम-ए-हलचल की खनक.., गीत कानो में मेरे गुन-गुनाती रही..।  दिन तो बे-करार ही था, अब रातें भी बे-चैन हो रही....।। नींद भी पलको पे बैठ, चाँदनी निहारती रही...।                   ...

•~ हम तुम्हे चाहते रहे ~•

ये चमन ये समां मुस्कुराते रहे, उम्र भर हम तुम्हे यूं चाहते रहे।। प्यार का ये खुमार न कम हो कभी, हम तुम्हे जिस्म-ओ-जां में बसा के रखे, अपनी पलको में तुमको छुपाये रहे, ये चमन ये समां मुस्कुराते रहे, उम्र भर हम तुम्हे यूं चाहते रहे।। तेरे बिन कोई पल गवारा नही, वक़्त का ना हो पहरा, ना हो बंदिशे कोई -2 तुम हमारे रहो.. हम तुम्हारे रहे, ये चमन ये समां मुस्कुराते रहे, उम्र भर हम तुम्हे यूं चाहते रहे।। खुद के दिल पे मेरा कोई बस ना रहा, धड़कता है अब तो बस तुम्हारे लिए, तेरे प्यार की तिश्नगी मुझमे यूं ही रहे, ये चमन ये समां मुस्कुराते रहे, उम्र भर हम तुम्हे यूं चाहते रहे।। आयुष राज "विजय"

•~ अरमान ~•

अरमान... तू ख्वाब मेरी,मैं तेरा अरमान बन जाऊं, तू मेरी मैं तेरी पहचान बन जाऊ खो जाए इस कदर एक दूजे में, कि तू मेरी मैं तेरी जान बन जाऊं || आयुष"विजय"

•~ संघर्ष ~•

ऐ जिंदगी यू हमे बदनाम न कर अभी तो जीना सीखा है,  परेशान न कर। संघर्षो के बीच हमे चलने तो दे पाव को जंजीरो से यू बेजार न कर।। आयुष राज "विजय"

•~ हाल-ए-दिल ~•

हमने उनसे हाल-ए-दिल क्या कहा, कि वो मुस्कुराये,सुनकर चले गये, अब उनके यू चले जाने को क्या समझे, कि उन्होंने इनकार या इकरार क्या कहा।। आयुष राज "विजय"

•~ उदास लम्हे ~•

उदास लम्हे,तन्हाई का आलम है, बेजुबां लब,नम आंखों की निशानी है, इश्क़ में टूटा किस कदर दिल, मेरी खामोशी ही उसकी कहानी है। आयुष राज "विजय"

•~ उड़ान ~•

बंदिशे बहुत है ,सामाजिक,रीति-रिवाजों की। कोशिश की इक उड़ान भरो तो, आसमां को इंतजार है, तुम्हारे कदम चूमने की।। आयुष राज "विजय"

दिल से..

मेरे सासों में बसी खुशबू,  धड़कते दिल की धड़कन हो।  अरमानो के मेरे पंख,ख्वाबो के नए रंग हो। चाहता हूँ बड़ी शिद्द्त से तुझे मै,  आइने में चेहरे की मेरे तुम तस्वीर हो। Aayush"vijay"

~• इजहार -2 •~

दो दिलो का प्यार, इजहार क्या कहना उसके भीगे लबो की मुस्कान का क्या कहना हम तो उसको कब का दिल दे बैठे थे पर आज उसके इकरार का क्या कहना।। आयुष राज "विजय"

~ ऐ हवा ऐ हवा गुनगुना तू जरा.. ~

ऐ हवा ऐ हवा गुनगुना तू जरा  ऐ हवा ऐ हवा गुनगुना तू जरा।।  रातो की नीदें मेरी यू ना चुरा,  ऐ हवा ऐ हवा गुनगुना तू जरा...........  मेरे ख्वाबो को मुझसे तू मिला,  ऐ हवा ऐ हवा गुनगुना तू जरा...........  वक्त ठहरा पल है ठहरा,  ठहरा जमीं आंसमा..  ऐ हवा ऐ हवा गुनगुना तू जरा...........  मैंने खुद को खुद में ढूढा,  पर न जाने गुम हूं कहां..  ऐ हवा ऐ हवा गुनगुना तू जरा...........  वो मिले दिल मिले,  इश्क का मुकम्मल हो जहां..  ऐ हवा ऐ हवा गुनगुना तू जरा...........  जिन्दगी यू चल पड़े,चल पड़े ये समां,  ऐ हवा ऐ हवा गुनगुना तू जरा।  ऐ हवा ऐ हवा गुनगुना तू जरा।।  Aayush "vijay"  

~ दिल मुझे समझाता रहा ~

दिल मुझे मै उसे समझाता रहा, पर ना माना कोई प्यार करता रहा,  दिल मुझे मै उसे समझाता रहा।  एक पल ऐसा रहा जब कोई  एक चेहरा निगाहों ने देखा किया,  उसकी रंगत निगाहों ने देखा किया,  दूर होकर भी तू पास रहता रहा दिल मुझे मै उसे समझाता रहा।  पर ना माना कोई प्यार करता रहा।।  मौशिकी का मजा मुझे आता रहा अपने निगाहों में सपने सजाता रहा,  सपने सच हो ये दुआ मांगता मै रहा,  दिल मुझे मै उसे समझाता रहा।  पर ना माना कोई प्यार करता रहा।।  Aayush "vijay"