http://epaper.navbharattimes.com/details/48582-32127-1.html दिन तो बे-करार ही था, अब रातें भी बे-चैन हो रही.. नींद भी पलको पे बैठ, चाँदनी निहारती रही .....2.।। बेशक दिल तो था पास मेरे, पर ख्यालो में यादें उनकी ही आती रही...। दिन तो बे-करार ही था, अब रातें भी बे-चैन हो रही..।। उनकी शबनमी झलक इन निगाहों ने देखा.. नूर-ए-शबनम अभी तक पी है रही , उनकी जुल्फों की घटाए भी.. गरज हम पे बरसती रही...। दिन तो बे-करार ही था, अब रातें भी बे-चैन हो रही...।। नींद भी पलको पे बैठ, चाँदनी निहारती रही...। साजिशें खूब हवाओं ने भी रची.. फिर भी खुशबू उनकी हम तक आती रही..., उनके तबस्सुम-ए-हलचल की खनक.., गीत कानो में मेरे गुन-गुनाती रही..। दिन तो बे-करार ही था, अब रातें भी बे-चैन हो रही....।। नींद भी पलको पे बैठ, चाँदनी निहारती रही...। ...
" हक में हमारे, अपने पल कर दो - तुम संग ही बीते,ऐसे सारे कल कर दो ....✍🏻आयुष राज "विजय" (मुहब्बत का कवि हूँ, समाज को आइना भी दिखाता हूँ )