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Showing posts from 2023

चलना सम्भल के...

चलना सम्भल के देखना, रस्ते की ठोकरें है लड़खड़ाए जिनके कदम,गिर है वो पड़े जिंदगी सफर है हौसलों का, ख्वाहिशों का तो फिर संघर्ष और अड़चनों से,हम क्यों डरे चलना सम्भल के देखना,रस्ते की ठोकरें है लड़खड़ाए जिनके कदम,गिर है वो पड़े ।। कुछ फैसलें जो हमने,इस सफर मे ले लिए मंजिल को जाने वाले फिर, रस्ते सरल हुये अब देखना है बस,मंजिल को गौर से थे जिनके लिए दिल मे, अरमां जगे हुये चलना सम्भल के देखना,रस्ते की ठोकरें है लड़खड़ाए जिनके कदम,गिर है वो पड़े ।। तुम हो मेरे जो फिर, किस बात से डरे मुमकिन है हर सफर, जब साथ तुम चले हो आधियां या तूफान,या पाँव मे छाले थामा है तुमने हाथ तो, बेखौफ हम लड़े चलना सम्भल के देखना,रस्ते की ठोकरें है लड़खड़ाए जिनके कदम,गिर है वो पड़े ।।                                                        आयुष राज "विजय"

फिर आज उनसे बात हुई..

आज फिर उनसे बात हुई, लहजे दोनों के नरम थे जो एक रात पहले, शब्दो के तीर चले थे उनको समेटते हुए,एक दूसरे को पूरा सुन रहे थे बीच गलतफहमी की दीवार ढह रही थी मन के उठे तूफान थम रहे थे चलो अच्छी पहल हुई, दोनों की सहमति से कल शायद जो रिश्ते दफ़न हो जाते हमेशा के लिए उसको बनाये रखने को, इरादे दोनों के प्रबल थे आज फिर उनसे बात हुई, लहजे दोनों के नरम थे। 

कुछ कहो तो...

अंदर के शोर को बाहर निकालो जिसे हर कोई सुने यू ना फिर कोई तुम पर कुछ कहे कुछ सुने।।                          आ युष राज "विजय"