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Showing posts from September, 2020

मुझे अच्छा नही लगता..✍️

न जाने क्यूं तेरा औरों के संग मुस्कुराना मुझे अच्छा नही लगता फिर वो पल,वो दिन,  मुझे अच्छा नही लगता मैं इस कदर पागल हूं तुझमे रहने को कि कोई लम्हा अब तेरे बिन अच्छा नही लगता न जाने क्यूं तेरा औरों के संग मुस्कुराना मुझे अच्छा नही लगता।। तेरे कुछ दायरे होंगे माना मैंने पर औरों से फ़ासले होना भी जरूरी है दोस्ती यारी तुम्हारी भी है माना मैंने पर तेरा ये रिश्ता  मुझे अच्छा नही लगता न जाने क्यूं तेरा औरों के संग मुस्कुराना मुझे अच्छा नही लगता।। फिर भी हमारे दरम्यां कुछ बिगड़ा नही है रिश्ते हमारे भी हम तुम निभा रहे कुछ मुस्कुराहटें हमारे लिए भी बचा के रखो क्योकि महफ़िल में तेरे हम हो ये औरों को अच्छा नही लगता न जाने क्यूं तेरा औरों के संग मुस्कुराना मुझे अच्छा नही लगता।।                                                         आयुष राज "विजय"

हम तो तनहा थे ,तनहा ही रह गए....✍️

ख़्वाहिशें दिल मे दफन, जमाने गुजर गए हम तो तनहा थे ,तनहा ही रह गए.... चाहत के कुछ खास पलो को बड़ी आस में जिया हमने तुझको चाहा पल पल तेरा इंतजार किया हमने पर अरमान मेरे पूरे ना हुए, अधूरे रह गए.. ख़्वाहिशें दिल मे दफन, जमाने गुजर गए हम तो तनहा थे ,तनहा ही रह गए....।। तुमने पलट कर ना देखा, हम बुलाते रह गए तेरी बज़्म में हम फरियाद लगाते रह गए क़ाश कभी मेरी मुहब्बत को ,तुमने समझा होता तुम भूले, हम भुलाने से रह गए।। ख़्वाहिशें दिल मे दफन, जमाने गुजर गए हम तो तनहा थे ,तनहा ही रह गए.... तेरी आवाज की वो खनक हम सुनने से रह गए गुलशन में खिलने को थे फूल, खिलने से रह गए उम्मीद ना छोड़ेंगे ,इक दिन  आना है  तुम्हे ... बस इसी इंतजार में "आयुष",तुम्हे लिखते रह गए... ख़्वाहिशें दिल मे दफन, जमाने गुजर गए हम तो तनहा थे ,तनहा ही रह गए....✍️✍️                                           आयुष राज "विजय"

• गलतफ़हमियां •

गलतफ़हमियां कुछ हमने तो,कुछ तुमने भी पाली, दरम्यां मुहब्बत के हमने ,शक की दीवार ढाली, मुक़ददर के तवारीख में, जो होगा मिलेगा हर हाल में वो या फिर चोट हो,तड़प हो या बिन हमसफ़र मकां खाली। गलतफ़हमियां कुछ हमने तो,कुछ तुमने भी पाली।।.. कोशिशें कुछ हमने तो,कुछ तुमने कर डाली, पर न जाने क्यों हर बार ,अपने हाथ रह गए खाली, यूं सब कुछ उस खुदा पर छोड़ना,या हो कोसना अच्छा तो नही चलो इक बार फिर करे खुद से मुहब्बत, शायद छटे ये घटा काली गलतफ़हमियां कुछ हमने तो,कुछ तुमने भी पाली, दरम्यां मुहब्बत के हमने ,शक की दीवार ढाली ।। गलतफहमियां कुछ हमने तो ,कुछ तुमने भी.........                                                                          आयुष राज "विजय"