न जाने क्यूं तेरा औरों के संग मुस्कुराना मुझे अच्छा नही लगता फिर वो पल,वो दिन, मुझे अच्छा नही लगता मैं इस कदर पागल हूं तुझमे रहने को कि कोई लम्हा अब तेरे बिन अच्छा नही लगता न जाने क्यूं तेरा औरों के संग मुस्कुराना मुझे अच्छा नही लगता।। तेरे कुछ दायरे होंगे माना मैंने पर औरों से फ़ासले होना भी जरूरी है दोस्ती यारी तुम्हारी भी है माना मैंने पर तेरा ये रिश्ता मुझे अच्छा नही लगता न जाने क्यूं तेरा औरों के संग मुस्कुराना मुझे अच्छा नही लगता।। फिर भी हमारे दरम्यां कुछ बिगड़ा नही है रिश्ते हमारे भी हम तुम निभा रहे कुछ मुस्कुराहटें हमारे लिए भी बचा के रखो क्योकि महफ़िल में तेरे हम हो ये औरों को अच्छा नही लगता न जाने क्यूं तेरा औरों के संग मुस्कुराना मुझे अच्छा नही लगता।। आयुष राज "विजय"
" हक में हमारे, अपने पल कर दो - तुम संग ही बीते,ऐसे सारे कल कर दो ....✍🏻आयुष राज "विजय" (मुहब्बत का कवि हूँ, समाज को आइना भी दिखाता हूँ )