ख़्वाहिशें दिल मे दफन, जमाने गुजर गए
हम तो तनहा थे ,तनहा ही रह गए....
चाहत के कुछ खास पलो को बड़ी आस में जिया हमने
तुझको चाहा पल पल तेरा इंतजार किया हमने
पर अरमान मेरे पूरे ना हुए, अधूरे रह गए..
ख़्वाहिशें दिल मे दफन, जमाने गुजर गए
हम तो तनहा थे ,तनहा ही रह गए....।।
तुमने पलट कर ना देखा, हम बुलाते रह गए
तेरी बज़्म में हम फरियाद लगाते रह गए
क़ाश कभी मेरी मुहब्बत को ,तुमने समझा होता
तुम भूले, हम भुलाने से रह गए।।
ख़्वाहिशें दिल मे दफन, जमाने गुजर गए
हम तो तनहा थे ,तनहा ही रह गए....
तेरी आवाज की वो खनक हम सुनने से रह गए
गुलशन में खिलने को थे फूल, खिलने से रह गए
उम्मीद ना छोड़ेंगे ,इक दिन आना है तुम्हे ...
बस इसी इंतजार में "आयुष",तुम्हे लिखते रह गए...
ख़्वाहिशें दिल मे दफन, जमाने गुजर गए
हम तो तनहा थे ,तनहा ही रह गए....✍️✍️
आयुष राज "विजय"

Comments