सोचा था ख़्वाब जवां है जवां रहेगे साथ है तेरा कभी तन्हा न होंगे उम्मीद न थी इस हकीकत की कि आज उन ख़्वाबो के बिखरे पन्ने होंगे। आयुष "विजय"
" हक में हमारे, अपने पल कर दो - तुम संग ही बीते,ऐसे सारे कल कर दो ....✍🏻आयुष राज "विजय" (मुहब्बत का कवि हूँ, समाज को आइना भी दिखाता हूँ )