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Showing posts from March, 2018

हकीकत

सोचा था ख़्वाब जवां है जवां रहेगे साथ है तेरा कभी तन्हा न होंगे उम्मीद न थी इस हकीकत की कि आज उन ख़्वाबो के बिखरे  पन्ने  होंगे। आयुष "विजय"