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Showing posts from 2018

नया साल ...✍️

2019 की पहली सहर का फरमान आ गया अरमानो को सच करने का इक़बाल आ गया बेसब्री से था इंतजार हमे जिसका ढेरों खुशियां लिए देखो नया साल आ गया।                                 आयुष राज"विजय"

~ तुम्हारी याद ~

आज फिर से तुम्हारी याद आयी है कुछ पुरानी मुलाकात याद आयी है बेबसी दिल की किससे कहूं इस तनहाई में आंख मेरी भर आयी है आज फिर से तुम्हारी याद आयी है कुछ पुरानी मुलाकात याद आयी है।। मेरी सांसों में तेरी ख़ुशबू फिर से आयी है ख़्वाबों में तू ही एक बार फिर से छायी है अपनी मोहब्बत का इज़हार किससे करू आज ज़ुबा की भी साथ देने से मनाही है आज फिर से तुम्हारी याद आयी है कुछ पुरानी मुलाकात याद आयी है।। आयुष राज "विजय" ...✍️

~ तनहाई ~

रात की तन्हाईयां ख़्वाबों बिना रूखी आँखें आँसुओ ने आंखों में पनाह ली है .. वो न समझा मुझे किस क़दर मशरूफ था उसमें उसने तो हमसे हमारी पहचान ली है। रात की तन्हाईयां ख़्वाबों बिना रूखी आँखें आँसुओ ने आंखों में पनाह ली है .. तनहा तो था पर यू तनहा न था अकेला था मगर कभी बहका न था न जाने क्या ख़ास था जो मैं सब हार गया उस पर अनजाने ही सही पर उसने हमसे हमारी जान ली है रात की तन्हाईयां ख़्वाबों बिना रूखी आँखें आँसुओ ने आंखों में पनाह ली है ..                                         अभी जारी है.....✍️ आयुष राज "विजय"

प्यार (एक दरिया)

हमारे दिल मे तेरी ही यादों का ठिकाना है प्यार के इस दरियां में हमको बहते जाना है इश्क़ करना यू हर किसी के वश की बातें है नही... जमाने को नही खुद को खुद ही भूल जाना है। आयुष राज "विजय"

स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) - विशेष

                                15 अगस्त 1947 को हमारे देश के आधुनिक भारत के नौ जीवन का आगाज हुआ।समूचा भारत हर्षोल्लास से ओत-प्रोत था।एक द्वि:स्वप्न पीछे छूट चुका था, और एक आज़ादी का प्रकाश पुंज बाहें फैला कर हमारा स्वागत कर रहा था।सभी भारतवासी के मन मे राम राज्य की कल्पना थी,और वह कह रहा था -         "अब न कभी डर होगा,न अँधेरा होगा,           उल्लवल होगा वर्तमान, और एक नया सवेरा होगा" दोस्तो आज आज़ादी के सातवें दशक में हम प्रवेश कर चुके है,भारत वही है,भारतीयता वही है,किन्तु आज का भारतवासी कह रहा है कि -             "हे जन गण मन के गान तुम्हारा क्या होगा         मेरे देश महान तुम्हारा क्या होगा       हे पुरखों के सम्मान तुम्हारा क्या होगा            प्यारा हिंदुस्तान तुम्हारा क्या होगा " आज देश की दशा और दिशा दोनो बदल चुके है,हमारा समाज आज...

अधूरी जिंदगी...

http://epaper.navbharattimes.com/details/823-27464-1.html तुम मेरा प्यार हो, जिंदगी का साज हो तुम बिना जिंदगी अधूरी मेरी।। -2 तुम मेरे आस हो ,हसरतो की प्यास हो रूह का स्पर्श, ताजा एहसास हो तुम मेरा प्यार हो, जिंदगी का साज हो तुम बिना जिंदगी अधूरी मेरी।। तुम मेरे साथ हो,धड़कनों के पास हो प्यार का नूर , कोहिनूर हो तुम मेरा प्यार हो, जिंदगी का साज हो तुम बिना जिंदगी अधूरी मेरी।। तुम मेरा ख्वाब हो,मेरा इंतजार हो दीप हो याद का,चांदनी रात हो तुम मेरा प्यार हो, जिंदगी का साज हो तुम बिना जिंदगी अधूरी मेरी।। तुम मेरी तिश्नगी हो,मेरी चाह हो तुम मेरे इज़हार का इकरार हो तुम मेरा प्यार हो, जिंदगी का साज हो तुम बिना जिंदगी अधूरी मेरी।। -2                                                                                        आयुष राज "विजय...

आ़बरू..-समाज को आइना

आज हम खुद अपनी नज़रों में गिर गए हवस में आकर वहशीपन पे गिर गए सोचा न की ये भी तो किसी की बहन या बेटी है हैवानियत में हम किस कदर   गन्दे दलदल में गिर गए ।।                                                     आयुष राज"विजय"

बस यूं ही....

कभी-कभी कही खो से जाता हूं सोचता हूं कुछ,कर कुछ और जाता हूं इस कदर "वो"काबिज है मेरे ख्यालो में. उसको पाने की चाहत में खुद को भूल जाता हूं।। आयुष राज "विजय"

•~ मुद्दत-ओ के बाद •~

मुद्दत-ओ के बाद मेरा वो प्यार मिला, कुछ देर से ही सही पर तेरा दीदार मिला.. 2 खुशबुएँ महक रही है, चमन-ए-गुलशन में, तेरी मौजूदगी का जब उन्हें एहसास मिला, मुद्दत-ओ के बाद मेरा वो प्यार मिला,  कुछ देर से ही सही पर तेरा दीदार मिला.. 2 अनसुलझे सवालो का तू जवाब मिला, कुछ बाकी ना रहा तेरी बाहों का जो आगोस मिला, खो गए हम कुछ इस कदर तुम में, जब तेरी जुल्फ की घटाओं का छाव मिला, मुद्दत-ओ के बाद मेरा वो प्यार मिला,  कुछ देर से ही सही पर तेरा दीदार मिला..  आयुष राज"विजय"

~ सिलसिला ~

मुलाकातों के सिलसिले ,कभी भी खत्म नही होंगे, हमारे दरम्यां रिश्ते ,कभी भी नम नही होंगे, चला ले ये जहां चाहे भी जितने बंदिशों के तीर, मेरा ये क़ौल तुझसे है, कभी भी दूर हम नही होंगे।। आयुष 'विजय'

हकीकत

सोचा था ख़्वाब जवां है जवां रहेगे साथ है तेरा कभी तन्हा न होंगे उम्मीद न थी इस हकीकत की कि आज उन ख़्वाबो के बिखरे  पन्ने  होंगे। आयुष "विजय"

•~ याद आता है ~•

वो रूठना तेरा ,मेरा मनाना याद आता है, मेरी बहकी बातों पे तेरा मुस्कुराना याद आता है।। मुलाकातों के सिलसिले,प्यार की वो बातें, तेरा दबे पांव दिल मे उतरना याद आता है, वो रूठना तेरा,मेरा मनाना याद आता है। मेरी बहकी बातों पे तेरा मुस्कुराना याद आता है।। जुबां की खामोशी , निगाहों का अंदाज-ए-बयां इजहार याद आता है, तेरी झुकी नजरो से अनकहा वो इकरार याद आता है। चाहत की जमी पर फैला आसमां प्यार का, रंगे गुलशन साथ यार का, तेरी हर शरारत पर मेरा खुद को मनाना याद आता है। वो रूठना तेरा ,मेरा मनाना याद आता है, मेरी बहकी बातों पे तेरा मुस्कुराना याद आता है।। जुनून-ए-इश्क़ का वो गुजरा जमाना याद आता है। तेरी हर ख्वाहिश पर हँसकर खुद को लुटाना याद आता है। मेरे प्यार की कोई इंतेहा न थी तेरी खातिर, तड़प उठता है दिल ,जब-जब वो फ़साना याद आता है वो रूठना तेरा ,मेरा मनाना याद आता है। मेरी बहकी बातों पे तेरा मुस्कुराना याद आता है। आयुष राज 'विजय'