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~ तनहाई ~



रात की तन्हाईयां ख़्वाबों बिना रूखी आँखें
आँसुओ ने आंखों में पनाह ली है ..
वो न समझा मुझे किस क़दर मशरूफ था उसमें
उसने तो हमसे हमारी पहचान ली है।
रात की तन्हाईयां ख़्वाबों बिना रूखी आँखें
आँसुओ ने आंखों में पनाह ली है ..
तनहा तो था पर यू तनहा न था
अकेला था मगर कभी बहका न था
न जाने क्या ख़ास था जो मैं सब हार गया उस पर
अनजाने ही सही पर उसने हमसे हमारी जान ली है
रात की तन्हाईयां ख़्वाबों बिना रूखी आँखें
आँसुओ ने आंखों में पनाह ली है ..
                              
         अभी जारी है.....✍️



आयुष राज "विजय"

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