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दिन तो बे-करार ही था,
अब रातें भी बे-चैन हो रही..
नींद भी पलको पे बैठ,
चाँदनी निहारती रही .....2.।।
बेशक दिल तो था पास मेरे,
पर ख्यालो में यादें उनकी ही आती रही...।
दिन तो बे-करार ही था,
अब रातें भी बे-चैन हो रही..।।
उनकी शबनमी झलक इन निगाहों ने देखा..
नूर-ए-शबनम अभी तक पी है रही ,
उनकी जुल्फों की घटाए भी..
गरज हम पे बरसती रही...।
दिन तो बे-करार ही था,
अब रातें भी बे-चैन हो रही...।।
नींद भी पलको पे बैठ,
चाँदनी निहारती रही...।
दिन तो बे-करार ही था,
अब रातें भी बे-चैन हो रही..
नींद भी पलको पे बैठ,
चाँदनी निहारती रही .....2.।।
बेशक दिल तो था पास मेरे,
पर ख्यालो में यादें उनकी ही आती रही...।
दिन तो बे-करार ही था,
अब रातें भी बे-चैन हो रही..।।
उनकी शबनमी झलक इन निगाहों ने देखा..
नूर-ए-शबनम अभी तक पी है रही ,
उनकी जुल्फों की घटाए भी..
गरज हम पे बरसती रही...।
दिन तो बे-करार ही था,
अब रातें भी बे-चैन हो रही...।।
नींद भी पलको पे बैठ,
चाँदनी निहारती रही...।
साजिशें खूब हवाओं ने भी रची..
फिर भी खुशबू उनकी हम तक आती रही...,
उनके तबस्सुम-ए-हलचल की खनक..,
गीत कानो में मेरे गुन-गुनाती रही..।
दिन तो बे-करार ही था,
अब रातें भी बे-चैन हो रही....।।
नींद भी पलको पे बैठ,
चाँदनी निहारती रही...।
आयुष राज "विजय"
फिर भी खुशबू उनकी हम तक आती रही...,
उनके तबस्सुम-ए-हलचल की खनक..,
गीत कानो में मेरे गुन-गुनाती रही..।
दिन तो बे-करार ही था,
अब रातें भी बे-चैन हो रही....।।
नींद भी पलको पे बैठ,
चाँदनी निहारती रही...।
आयुष राज "विजय"

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