उदास लम्हे,तन्हाई का आलम है,
बेजुबां लब,नम आंखों की निशानी है,
इश्क़ में टूटा किस कदर दिल,
मेरी खामोशी ही उसकी कहानी है।
आयुष राज "विजय"
" हक में हमारे, अपने पल कर दो - तुम संग ही बीते,ऐसे सारे कल कर दो ....✍🏻आयुष राज "विजय" (मुहब्बत का कवि हूँ, समाज को आइना भी दिखाता हूँ )
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