उठो हे शक्ति अब व्रत तोड़ो
इन दुष्टो का संघार करो
तुम्हे किसी की क्या जरूरत
तुम खुद ही अपना हथियार बनो
इस कलयुग में कोई कृष्ण न आएंगे
जो द्रोपदी का फिर चीर बढ़ाएंगे
सो अब खुद खड्ग,तीर,तलवार उठाओ
कलयुग के दुर्योधन का मान मिटाओ
कर अंत दुष्ट का फिर से सृष्टि का सार बनो
तुम खुद ही अपना हथियार बनो
उठो हे शक्ति अब व्रत तोड़ो
इन दुष्टो का संघार करो।।
आयुष राज "विजय"
आयुष राज "विजय"
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