आशिकी मे तुम पर जां हम लुटाते रहे ।
और तुम तो हमे आजमाते रहे ।। -2
ता उम्र हम तुम्हे चाहते रहे ,
आशिकी मे तुम पर जां हम लुटाते रहे ।
तुम को चाहा है,हमने सब भूल कर,
तेरे यादो की रंगी चुनर ओढ़ कर,
उसपे सपने नये हम सजाते रहे।
और तुम तो हमे आजमाते रहे ।।
आशिकी मे तुम पर जां हम लुटाते रहे ।
और तुम तो हमे आजमाते रहे ।। -2
हमको मिले जमाने के कितने गम,
पर अपने आँसू को पलको मे छुपाये रहे,
और तुम्हे खुशियां बांटते हम रहे,
और तुम तो हमे आजमाते रहे ।
आशिकी मे तुम पर जां हम लुटाते रहे ।
और तुम तो हमे आजमाते रहे ।। -2
~ आयुष राज तिवारी ~
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