मै एेसी डगर चला ऐ ज़हीरो ,
जिसपर कोई अ़स्फाक ना मिला ,
मगर मिले बहुत अग्यार, अालिम ,
पर कोई निगार ना मिला ।
मै ऐसी डगर चला ऐ जहीरो ,
जिसपर कोई अ़स्फाक ना मिला ।।
जिसपर कोई अ़स्फाक ना मिला ।।
मेरा उफ्ताद तो देखो ऐ हबीबो ,
कि मेरे जमीर को जदा तो मिली,
पर कोई गमगुस्सार ना मिला ।
मै ऐसी डगर चला ऐ जहीरो ,
जिसपर कोई अ़स्फाक ना मिला ।।
जिसपर कोई अ़स्फाक ना मिला ।।
मेरा कोई नालिश नही जमाने से,
मुझे अब्तर मेरे अपनो ने किया,
क्या पता इसका अस्बाब क्या था,
पर मुझे बहुत अहजान मिला ।
मै ऐसी डगर चला ऐ जहीरो ,
जिसपर कोई अ़स्फाक ना मिला ।।
जिसपर कोई अ़स्फाक ना मिला ।।
~• आयुष राज " विजय "~
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