अपने प्यार को अंजाम दे न सका ,
उनके कांधे पर सिर रख कर सो न सका ,
उसकी खता भी क्या कहूं ,
मै खुद इश्क का पैगाम दे न सका ।।
तमन्ना थी उन्हे आग़ोश मे लेने की ,
पर ख्वाहिश अधूरी रह गयी ,
मै उस फिदाई की फितरत क्या कहूं ,
मै फसाने का इल्म करा न सका ।।
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