बचपन का हर पल याद आता है,
सोचकर मां- बाप के संघर्षो को अपना दिल भर जाता है
" कदम पहला चला था पिता की अंगुली पकड़ कर,
कभी खुद चलता और गिरता अगर ,
मां मेरी दौड़ कर आती उधर ,
और कहती मुझसे मेरे लाल तुम जा रहे थे किधर,"
बचपन का हर पल याद आता है,
सोचकर मां- बाप के संघर्षो को अपना दिल भर जाता है
इसके आगे मै लिख नही पाया और मेरी कलम रुक गयी, शायद इसके आगे लिख पाऊ ?
# आयुष राज तिवारी #
# आयुष राज तिवारी #
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