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•~ वजूद ~•

पनपते रहे वो ख्वाब , जिनका वजूद न  था 
मेरे कोई नही इतना , जितना तू करीब था
पनपते रहे वो ख्वाब , जिनका वजूद न  था 
प्यार का हमारे असास , इतना नाजुक न था 
बस अपने कौल से मुकर तू गया 
इश्क मे मिलते है जरर भी, इसका एहसास न था
पनपते रहे वो ख्वाब , जिनका वजूद न  था 
मेरे कोई नही इतना , जितना तू करीब था
अपनी फितरत मे , फरेब न था 
 समां पे जलने को , परवाना हो गया
मै इतना भी तो बेगाना न था 
मेरे कोई नही इतना , जितना तू करीब था
पनपते रहे वो ख्वाब , जिनका वजूद न  था 
मेरे कोई नही इतना , जितना तू करीब था

                             

                             - आयुष राज ''विजय''

Comments

Anonymous said…
Heart touching.

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