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• गलतफ़हमियां •




गलतफ़हमियां कुछ हमने तो,कुछ तुमने भी पाली,

दरम्यां मुहब्बत के हमने ,शक की दीवार ढाली,

मुक़ददर के तवारीख में, जो होगा मिलेगा हर हाल में

वो या फिर चोट हो,तड़प हो या बिन हमसफ़र मकां खाली।

गलतफ़हमियां कुछ हमने तो,कुछ तुमने भी पाली।।..

कोशिशें कुछ हमने तो,कुछ तुमने कर डाली,

पर न जाने क्यों हर बार ,अपने हाथ रह गए खाली,

यूं सब कुछ उस खुदा पर छोड़ना,या हो कोसना अच्छा तो नही

चलो इक बार फिर करे खुद से मुहब्बत, शायद छटे ये घटा काली

गलतफ़हमियां कुछ हमने तो,कुछ तुमने भी पाली,

दरम्यां मुहब्बत के हमने ,शक की दीवार ढाली।।

गलतफहमियां कुछ हमने तो ,कुछ तुमने भी.........

                                        

                                आयुष राज "विजय"

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