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कुछ ख़्वाब अधूरे होते है...✍🏻




कुछ ख़्वाब अधूरे होते है

जीवन के कुछ पन्ने कोरे होते है

खुशियों की चाहत हम हर पल करते है

पर कुछ पल उनमे धोखे होते है

कुछ ख़्वाब अधूरे होते है

जीवन के कुछ पन्ने कोरे होते है।।

मैंने साथ तुम्हारा मांगा था

कुछ पल प्यार तुम्हारा मांगा था

खोकर रातों की नीदें ,चाँद निहारा करता था

अब तो दिन भी रूखे रूखे होते है

कुछ ख़्वाब अधूरे होते है

जीवन के कुछ पन्ने कोरे होते है।।

दिल की तन्हाई को साथ तुम्हारा मिलना था

प्यार भरी राहों पर संग संग दोनों को चलना था

अब भी वे राहें राह हमारी तकती होगीं

ढूढ़ती होगीं उन कदमों को जो साथ हरकदम होते हैं

कुछ ख़्वाब अधूरे होते है

जीवन के कुछ पन्ने कोरे होते है।।

इजहार-ए-मोहब्बत हमने किया,एतबार तुम्हे तो करना था

चाहा था प्यार तुम्हारा हमने,इकरार तुम्हें तो करना था

तेरी हर ख्वाहिश पर सौ बार निछावर हो जाता 

तेरी इक हां पर मै क्या न कर जाता

पर हर किस्से कहा पूरे होते है

कुछ ख़्वाब अधूरे होते है

जीवन के कुछ पन्ने कोरे होते है।।



                                        आयुष राज "विजय"

Comments

Unknown said…
प्रिय आयुष,बेहद उम्दा रचना द्वारा अपना परिचय दिया आपने,आपके जीवन में इसी तरह क्रियाशील ता बनी रहे ,इन्हीं शुभकामनाओं के साथ.......
जितेन्द्र राठौड़
आपका बहुत बहुत आभार 🙏🏻

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