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~• अंजाम-ए-इश्क •~

चाहत को मेरी वो यू ठुकरा गये
इन आंखो मे आंसुओ को पनाह दे गये
आरजू थी उनके जैसे हमसफर की
पर सफर मे हमे वो अकेला छोड़ गये।
चाहत को मेरी वो यू ठुकरा गये
इन आंखो मे आंसुओ को पनाह दे गये।।
दिखा ना सकू किसी को ऐसा जख्म दे गये
प्यार नही है कह कर बेगाना बना गये
हम तो उन पलो को भुला ना सकेगे
जिस पल हमारे सपने को वो हमसे जुदा कर गये।
चाहत को मेरी वो यू ठुकरा गये
इन आंखो मे आंसुओ को पनाह दे गये।।
छेड़ी थी धुन इक प्यार की जिसे अनसुना कर गये
हमारी वफाओ का वो हमे ऐसा सिला दे गये
हमारी कमियों को हमसे बयां तो किया होता
पर न जाने क्यू हमसे वो इतना खफा हो गये।
चाहत को मेरी वो यू ठुकरा गये
इन आंखो मे आंसुओ को पनाह दे गये।।


Aayush raj " Vijay" 

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